उद्धव ठाकरे के 16 विधायक छोड़ेंगे पार्टी!सांसदों के बाद विधायकों पर टिकी सत्ता पक्ष की निगाहें

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर जून का महीना शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए संकट बनकर सामने आया है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना और महाराष्ट्र की सत्ता हिल गई थी। यही संयोग फिर जून 2026 में बना है। शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के जाने के बाद अब उद्धव ठाकरे के सामने विधायकों के टूटने का खतरा है।यह संयोग ही है कि फिर जून में ही शिवसेना (यूबीटी) में बगावत हुई और पार्टी के नौ में से छह सांसद टूट गए। 22 जून से 10 जुलाई तक महाराष्ट्र विधानमंडल के सत्र के दौरान या उसके तुरंत बाद ऑपरेशन टाइगर-2 शुरू हो सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण होगा। बता दें, विधानसभा के 288 सदस्यों में शिवसेना (यूबीटी) के 20 विधायक और विधान परिषद में 6 सदस्य हैं।

विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद विपक्षी खेमा महाविकास आघाडी (एमवीए) में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के सबसे अधिक विधायक हैं। वहीं, एमवीए के अन्य घटक दल कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायक हैं। दूसरी ओर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 57 विधायक और 8 विधान परिषद सदस्य हैं।शिवसेना के विधायक कृपाल तुमाने ने हाल में दावा किया था कि शिवसेना (यूबीटी) के 20 में से 16 विधायक पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं। इससे सांसदों के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों के टूटने की चर्चा को बल मिला है। शिवसेना नेता व राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट का कहना है कि हम कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं चला रहे, लेकिन कोई नेता हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं तो हम मना नहीं करेंगे। मानसून सत्र में सियासत नया मोड़ ले सकती है।

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