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राजनाथ सिंह ने बताया डिफेंस रोडमैप,भारत की निर्यात क्षमता को बनाया जाएगा और अधिक सशक्त

राजनाथ सिंह ने बताया डिफेंस रोडमैप,भारत की निर्यात क्षमता को बनाया जाएगा और अधिक सशक्त
  • PublishedJanuary 19, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश को गोला-बारूद के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना केवल लक्ष्य भर नही है, बल्कि यह आज की सामरिक जरूरत बन गई है. आज हम चाहते है कि भारत गोला-बारूद के उत्पादन में ग्लोबल केंद्र बने. रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को आज एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने की जरूरत है. दोनों एक-दूसरे के पूरक बने और एक-दूसरे की ताकत को पहचानें और देशहित में उसका उपयोग करें.राजनाथ सिंह ने कहा कि जो चीजें हम नहीं बना सकते, उनके लिए भी कम से कम, 50% स्वदेशी कंटेंट का प्रावधान तो किया ही जा सकता है. इन्हीं प्रयासों के वजह से हम कई क्षेत्रों में अपना स्वदेशी उपयोग बढ़ाने में सफल हुए हैं. साथ ही इससे प्राइवेट सेक्टर का मनोबल भी बढ़ा है. अब सरकार की कोशिश है कि निजी कंपनियों को और भी मौके मिलें ताकि वह सार्वजनिक क्षेत्र के साथ साथ कदम मिलाकर चल सकें.

यही नहीं, अब सरकार का ध्यान सिर्फ इस बात पर नहीं है कि डिफेंस के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर का योगदान बढ़ना चाहिए, बल्कि इस बात पर भी है कि आने वाले समय में रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका 50% या उससे भी ज़्यादा हो.रक्षा मंत्री ने खासतौर पर सोलर ग्रुप द्वारा निर्मित नागास्त्र ड्रोन का जिक्र किया, जिसका सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद कुशलता से इस्तेमाल किया. इसी ड्रोन ने देश की तरफ बुरी नजर रखने वाले आतंकियों के ठिकानों पर सटीक प्रहार किया. उन्होंने कहा कि अब नागास्त्र के और भी अधिक आधुनिक वर्जन विकसित किए जा चुके हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर ये हथियार हमारे शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होंगे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की मीडियम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण इकाई का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस फैसेलिटी में विकसित पिनाका मिसाइलों का निर्यात भी शुरू हो चुका है. कई अन्य देशों ने भी इसे खरीदने में रुचि दिखाई है. राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां, न केवल हमारे रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि भारत की निर्यात क्षमता को भी और अधिक सशक्त बनाती हैं. तभी तो आज हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन जो 2014 में जहां मात्र 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है. बड़ी बात यह है कि इसमें से 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान प्राइवेट सेक्टर का है. प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी का ही नतीजा है कि भारत का रक्षा निर्यात, जो दस वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, आज वह बढ़कर रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इससे साफ है कि भारत अब सिर्फ आयातक नहीं रहा, बल्कि तेजी से निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री के मुताबिक देश मे प्राइवेट सेक्टर और पब्लिक सेक्टर के बीच एक अनूठा और प्रभावी तालमेल है. एक तरफ सक्षम और अनुभवी पब्लिक सेक्टर की संस्थाएं हैं, तो वहीं दूसरी ओर मजबूत होती हुई तेजी से आगे बढ़ती हुई प्राइवेट बड़ी-बड़ी कंपनियां भी हैं. यह तालमेल अपने आप में बहुत दुर्लभ है. अब आवश्यकता इस बात कि है कि हम इस तालमेल को और गहरा करें.

Written By
Aagaaz Express

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