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1000 से सीधे 20 हजार होगा मेडिकल भत्ता?8वें वेतन आयोग में होगा कर्मचरियों को बड़ा फायदा

1000 से सीधे 20 हजार होगा मेडिकल भत्ता?8वें वेतन आयोग में होगा कर्मचरियों को बड़ा फायदा
  • PublishedMarch 3, 2026

जब से केंद्र ने पिछले नवंबर में 8वें सेंट्रल पे कमीशन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए हैं, कई कर्मचारी प्रतिनिधि संस्थाओं ने चिंता जताई है कि आखिरी ढांचे में उनकी कई जरूरी मांगें साफ तौर पर शामिल नहीं हैं. जैसे-जैसे 8वें पे कमीशन की प्रक्रिया अब तेज हो रही है, सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारी और पेंशनर्स के बीच उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. इस बार चर्चा सिर्फ फिटमेंट फैक्टर या बेसिक पे में बदलाव तक सीमित नहीं है. एक अहम सुझाव यह भी है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को 1,000 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीने किया जाए, खासकर उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए जो सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम नेटवर्क के तहत नहीं आते.कर्मचारी संगठनों ने पिछले साल जनवरी में ही सरकार के सामने अपनी मांगें रखना शुरू कर दिया था, जब केंद्र सरकार ने 8वें पे कमीशन बनाने की घोषणा की थी. मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने भी नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड से टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) पर सुझाव मांगे थे. स्टाफ साइड का कहना है कि उनकी कई जरूरी मांगें आखिरी ToR में जगह नहीं पा सकीं. फिटमेंट फैक्टर, OPS की बहाली और मेडिकल सुविधाओं जैसे मुद्दों पर साफ जानकारी न होने से नाराजगी जताई गई. हाल ही में 8वें पे कमीशन को जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में दफ्तर दिया गया. कमीशन की चेयरमैन सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई हैं. इसे कमीशन के कामकाज के शुरू होने का संकेत माना जा रहा है.सबसे ज्यादा चर्चा इस मांग पर है कि नॉन-CGHS इलाकों में फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीना किया जाए. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा मेडिकल महंगाई के मुकाबले 1,000 रुपये बहुत कम रकम है. यह राशि खासकर गांव या दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए काफी नहीं है. यूनियन का तर्क है कि जब हेल्थ खर्च तेजी से बढ़ा है, तो मेडिकल अलाउंस भी जमीन की हकीकत के हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर 8वें पे कमीशन की आधिकारिक कार्रवाई और उसकी सिफारिशों पर है. अगर FMA को 20,000 रुपये प्रति महीने तक बढ़ाने जैसी मांगें मान ली जाती हैं, तो यह बड़ी राहत साबित हो सकती है, खासकर नॉन-CGHS इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए. फिलहाल, कर्मचारी संगठन अपने एजेंडा को और मजबूत करने में लगे हैं. आने वाले महीनों में साफ होगा कि सरकार इन मांगों को कितनी हद तक मानती है और 8वां पे कमीशन कर्मचारियों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

Written By
Aagaaz Express

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