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यूरेनियम का अपना भंडार सौंपने को तैयार हुआ ईरान,ट्रंप ने किया बड़ा दावा

यूरेनियम का अपना भंडार सौंपने को तैयार हुआ ईरान,ट्रंप ने किया बड़ा दावा
  • PublishedApril 17, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान यूरेनियम का अपना भंडार सौंपने पर सहमत हो गया है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते पर पहुंचने के करीब हैं, जिससे छह हफ्ते से चल रहा संघर्ष खत्म हो सकता है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने इस संघर्ष पर चल रही बातचीत में एक बड़ी सफलता बताया. उन्होंने ये भी कहा कि अगर ईरान और अमेरिका में डील हो जाती है तो मैं पाकिस्तान जाऊंगा. वे मुझे चाहते हैं.उन्होंने कहा कि वे हमें न्यूक्लियर डस्ट वापस देने पर सहमत हो गए हैं. उन्होंने समृद्ध यूरेनियम के लिए अपने शब्द का प्रयोग किया, जिसके बारे में वाशिंगटन का मानना है कि इसका इस्तेमाल न्यूक्लियर हथियार बनाने में किया जा सकता है.ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर इसी वीकेंड में हो सकता है, जो वार्ता में प्रगति का संकेत है. साथ ही, उन्होंने मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने की आवश्यकता पर संदेह जताया. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इसे बढ़ाने की ज़रूरत है और साथ ही यह भी कहा कि तेहरान अब पहले से ज़्यादा लचीला रुख अपना रहा है.ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हमारे संबंध इस समय बहुत अच्छे हैं, भले ही इस पर विश्वास करना मुश्किल हो. उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि यह लगभग चार हफ्ते की बमबारी और एक बहुत ही शक्तिशाली नाकाबंदी का मिलाजुला परिणाम है.ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं पिछली वार्ता में एक अहम मुद्दा थी. अमेरिका ने ईरान द्वारा सभी न्यूक्लियर गतिविधियों को 20 वर्षों के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा – जो स्थायी प्रतिबंध की लंबे समय से चली आ रही मांगों के मुकाबले एक स्पष्ट रियायत थी. रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान ने तीन से पांच वर्षों के लिए प्रतिबंध का सुझाव दिया.वाशिंगटन ने ईरान से किसी भी प्रकार का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम हटाने पर जोर दिया है. तेहरान ने अपने ऊपर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है. दो ईरानी सूत्रों ने कहा कि अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार पर समझौते के संकेत उभर रहे हैं, जिसमें तेहरान इसका कुछ हिस्सा, लेकिन पूरा नहीं, देश से बाहर भेजने पर विचार कर रहा है, जिसे उसने पहले खारिज कर दिया था.

हालांकि ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल होती है तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो लड़ाई फिर से शुरू हो जाएगी. उन्होंने युद्धविराम की नाजुक स्थिति का जिक्र किया, जो अगले हफ्ते खत्म होने वाला है. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ईरान अब उन बातों को मानने को तैयार है जो वह दो महीने पहले मानने को तैयार नहीं था, जो बढ़ते दबाव के कारण हुई रियायतों की ओर इशारा करता है.एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में, ट्रंप ने कहा कि यदि इस्लामाबाद में समझौता होता है तो वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो सकते हैं, जो वार्ता के राजनयिक महत्व को दर्शाता है. अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना के जनरल आसिम मुनीर की भूमिका की प्रशंसा करते हुए ट्रंप ने कहा, अगर इस्लामाबाद में समझौता होता है, तो मैं जा सकता हूं.ट्रंप की ये टिप्पणियां व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट के उस बयान के एक दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता बहुत संभव उसी स्थान पर होगी जहां पहले हुई थी. ट्रंप ने ईरान के मुद्दे को व्यापक वैश्विक चिंताओं से जोड़ते हुए कहा कि पोप लियो 14 के लिए तेहरान से उत्पन्न खतरे को पहचानना अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, पोप को समझना होगा, यह बहुत सरल है, ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं रख सकता. दुनिया बहुत बड़े खतरे में पड़ जाएगी. ये टिप्पणियां ईरान संघर्ष को लेकर दोनों नेताओं के बीच चल रहे सार्वजनिक मतभेद के बीच आई हैं, जहां पोप बार-बार संयम और शांति का आह्वान कर रहे हैं, जबकि ट्रंप एक कठोर रुख का बचाव कर रहे हैं.

Written By
Aagaaz Express

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