समंदर में फंसे भारतीय जहाजों का रास्ता हुआ क्लियर,किसानों के लिए खाद का जल्द पहुंचेगा बड़ा स्टॉक
फारस की खाड़ी में पैदा हुए तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के ऐलान की उम्मीदों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सुरक्षित होती दिख रही है. सोमवार को भारत आने वाले एलएनजी कैरियर ‘दिशा’ ने इस रास्ते को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है. इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में फंसे 34 अन्य भारतीय तथा विदेशी झंडे वाले जहाजों के भी जल्द ही सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 35 भारत आने वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए थे, जिनमें से 13 जहाज भारतीय झंडे वाले थे. इन जहाजों में कच्चा तेल, गैस के अलावा किसानों के लिए बेहद जरूरी खाद भरी हुई है.उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयसी के अनुसार, महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में फंसे इन जहाजों में से 16 पर खाद लदी है. इनमें से आठ में यूरिया, चार में डीएपी (DAP), तीन में सल्फर तथा एक जहाज में अमोनिया है. इन जहाजों के भारत पहुँचने से देश के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी. इसके अलावा बाकी जहाजों की बात करें तो 15 जहाजों में कच्चा तेल, एलएनजी तथा एलपीजी मौजूद है, जबकि तीन जहाजों में अन्य प्रकार का कार्गो लदा है. जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया किएलएनजी कैरियर ‘दिशा’ अपने साथ 62,370 टन गैस लेकर आ रहा है. इस जहाज के 18 जून के आसपास दाहेज बंदरगाह पहुंचने की पूरी संभावना है. अब तक 10 भारतीय झंडे वाले तथा 5 विदेशी झंडे वाले जहाज इस रास्ते को सुरक्षित पार कर चुके हैं.सप्लाई लाइन खुलने के बावजूद भारत की ऊर्जा संबंधी दिक्कतें रातों-रात खत्म नहीं होंगी. कतर तथा यूएई में हुए हालिया हमलों के कारण ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. भारत का कतर एनर्जी के रास लाफान (Ras Laffan) संयंत्र के साथ गैस सप्लाई का लंबी अवधि का करार है. अधिकारियों का कहना है कि यहां एलएनजी की दो प्रोसेसिंग यूनिट (ट्रेन) क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे इसकी उत्पादन क्षमता में सीधे तौर पर 17% की बड़ी गिरावट दर्ज की गईहै. इसी तरह यूएई के हबशान (Habshan) गैस प्लांट का कामकाज भी पूरी तरह से बाधित हुआ था.

हालांकि प्लांट की 60% क्षमता बहाल कर ली गई है, लेकिन अधिकारियों को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक यह 80% क्षमता पर काम कर पाएगा. इसके पूरी तरह से दुरुस्त होने में 2027 तक का समय लगेगा. ऐसे में गैस आपूर्ति के पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लग सकता है.भारतीय अर्थव्यवस्था के नजरिए से होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना बेहद अहम है. इस विवाद के शुरू होने से पहले, भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का 88% से ज्यादा हिस्सा आयात करता था. इसका करीब आधा हिस्सा केवल पश्चिम एशिया से ही भारत पहुँचता था. इसके साथ ही, देश की 60% से अधिक आयातित एलएनजी भी इसी जलमार्ग से होकर आती थी. वहीं, पश्चिम एशिया से आने वाली एलपीजी का 90% हिस्सा (जो कुल आयात का 60% है) होर्मुज के रास्ते ही आयात किया जाता था. अब जब हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तो इससे समुद्री रास्तों पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा. जहाजों की यहसुरक्षित वापसी देश के उद्योगों का पहिया चालू रखने में मददगार साबित होगी, जिससे बाजार में ईंधन के दाम स्थिर रहने की संभावना मजबूत होगी.