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चुनाव आयोग को लेकर क्या सच में भ्रम फैला रहा है विपक्ष,जानें ECI ने बयान जारी कर क्या कहा?

चुनाव आयोग को लेकर क्या सच में भ्रम फैला रहा है विपक्ष,जानें ECI ने बयान जारी कर क्या कहा?
  • PublishedSeptember 27, 2026

सीईसी विवाद पर एनडीए के सहयोगी पहले विफर गए थे लेकिन ECI के बयान के बाद उनकी सारी गलतफहमियां दूर हो गई हैं. बीजेपी के सहयोगियों ने शनिवार को आयोग के उस बयान का स्वागत किया, जिसने मीडिया में चल रही अनबन की खबरों पर विराम लगा दिया. कुछ अखबारों और चैनलों में कहा जा रहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) के बीच SIR को लेकर मतभेद है. लेकिन चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. शनिवार को चुनाव आयोग के द्वारा जारी बयान के बाद लोजपा रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और NDA के सहयोगी चिराग पासवान ने कहा, जनता के मन में जब कोई सवाल या चिंता आती है, तो उसे सामने रखना और उसका सही जवाब सुनिश्चित करना मेरी जिम्मेदारी है. SIR को लेकर लोगों की जो चिंताएं हमारे पास आईं, उन्हें हमने इसी जिम्मेदारी से चुनाव आयोग के सामने रखा.चिराग ने आगे कहा, हम चाहते थे कि चुनाव आयोग इन चिंताओं को गंभीरता से ले और हर बात साफ-साफ बताए. आज चुनाव आयोग ने एक-एक मुद्दे पर अपनी बात साफ कर दी है.

SIR की प्रक्रिया, तीनों आयुक्तों की सहमति और कैबिनेट सचिव से हुई बैठक के बारे में भी सारी बातें स्पष्ट कर दी गई हैं. यह स्पष्टता लोकतंत्र में जनता का भरोसा और बढ़ाती है. चुनाव आयोग लोकतंत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए अब देश की जनता का लोकतंत्र पर विश्वास और मजबूत हुआ है.

चिराग ने कहा कि विपक्षी दल लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. कहीं न कहीं इस पत्र के माध्यम से जवाब मिला है. जब चुनाव आयोग के खिलाफ ऐसे सवाल उठाएं जाते है तो उन राज्यों के लिए विपक्ष जवाब क्यों नहीं देता जहां विपक्ष की सरकार बनी है.वहीं, एनडीए के दूसरे सहयोगी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सुप्रीमो एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा, थोड़े समय के राजनीतिक फायदे के लिए भारत के लोकतंत्र या चुनाव प्रक्रिया पर दुनिया का भरोसा तोड़ने की कोशिशें बहुत गलत हैं. चुनाव के नतीजे जनता की इच्छा दिखाते हैं. मजबूत लोकतंत्र में नेता बनने का मतलब है जीत और हार दोनों को सम्मान और विनम्रता से स्वीकार करना.

नायडू ने आगे कहा कि हमारे संविधान के संस्थानों का सम्मान सबसे जरूरी है. भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी पार्टियों के नेताओं की साझा जिम्मेदारी है.SIR पर चुनाव आयुक्तों में मतभेद की खबरों के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को बयान जारी किया. इसमें कहा गया, हाल के महीनों में चुनाव आयोग ने देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए हैं. बिहार से शुरू करके पश्चिम बंगाल और बाकी 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 24 जून 2025 को जो एसआईआर का आदेश निकला था, वह आयोग की पूरी सहमति से लिया गया था.

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को सही ठहराया है. 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को भी आयोग की पूरी सहमति से जारी किया गया था, तीसरे चरण के बाकी 12 राज्यों में अंतिम सूची छपने के बाद ही मतदाताओं की अंतिम संख्या पता चलेगी.

Written By
Aagaaz Express

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