PoK के बाद बलूचिस्तान में दिखी आक्रोश,प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने शुरू की जुल्म

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद अब बलूचिस्तान भी एक बार फिर अशांति की चपेट में आता दिखाई दे रहा है. बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स और अन्य सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर बल प्रयोग किया.साथ ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं. ये प्रदर्शनकारी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, जबरन गुमशुदगियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे थे. कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं. स्थानीय स्रोतों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की और विरोध को दबाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ाई जा रही है. हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इन सभी दावों की पुष्टि भी नहीं हो सकी है.बलूचिस्तान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. पीओके में जारी असंतोष के बीच अब बलूचिस्तान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिस पर देश और विदेश के कई मानवाधिकार संगठन नजर बनाए हुए हैं.पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बिगड़ते मानवाधिकार संकट के विरोध में जर्मनी के ब्रेमेन शहर में बलूच कार्यकर्ता इकट्ठा हुए. उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर लोगों को जबरन गायब करने, हिरासत में हत्या करने और सामूहिक सजा देने का आरोप लगाया. बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से दखल देने की मांग की गई. प्रदर्शनकारियों ने ग्वादर जिले में सेना के छापे और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार के नए आरोपों का जिक्र किया.सभा को संबोधित करते हुए BNM के वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सामूहिक सजा की कार्रवाई कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि लोगों को जबरन गायब करना और हिरासत में हत्या करना आम बात हो गई है, साथ ही घरों को तोड़ा जा रहा है और परिवारों को जबरदस्ती विस्थापित किया जा रहा है.

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