Blog

अपने फैसलों से सबको चौंकाते रहती है बीजेपी,किसी को नहीं पता था नितिन नवीन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी

अपने फैसलों से सबको चौंकाते रहती है बीजेपी,किसी को नहीं पता था नितिन नवीन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी
  • PublishedDecember 15, 2025

तब तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ को फोन कर बताया कि आपको लखनऊ जाना है, उप्र सरकार की कमान संभालनी है. यह मेरे दिल्ली स्थित आवास पर हुआ था.’ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 2017 के विधानसभा चुनावों में BJP और उसके सहयोगियों की जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने की सूचना देने के क्षणों को याद करते हुए रविवार को यह बात बताई. दरअसल सरप्राइज देना BJP का स्टाइल रहा है. रविवार को इसमें एक और नाम नितिन नबीन का जुड़ा. तमाम अटकलों के बीच उन्हें बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई. भारतीय जनता पार्टी (BJP) अक्सर ऐसे फैसले ले लेती है, जिसकी पार्टी नेताओं को भी भनक नहीं होती. रणनीतिक-राजनीतिक फैसलों के साथ-साथ नेता चुनने के बाद में भी बीजेपी चौंकाती रही है. रविवार को BJP ने जब कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के नाम की घोषणा की तो यह फैसला भी चौंकाने वाला ही था. दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के नाम की दूर-दूर तक चर्चा नहीं थी. आम तौर पर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय नेतृत्व से ही होता है. लेकिन ये भारतीय जनता पार्टी है, जिसके अगले फैसले की जानकारी उसको भी नहीं होती, जिसके नाम की घोषणा की जाती है. नितिन नवीन के मामले में भी ऐसा ही रहा. रविवार को अपने विधानसभा में कार्यकर्ता सम्मेलन कर रहे नितिन नवीन को कही से यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें बीजेपी इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है. अब हालांकि नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं. बीजेपी सूत्रों की मानें तो 14 जनवरी के बाद उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेवारी दी सकती है. जनवरी में जब वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे तब वो बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. अगले साल जनवरी में जब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे तब उनकी उम्र केवल साढ़े 45 वर्ष रहेगी.इससे पहले अमित शाह 49 वर्ष की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे. जबकि नितिन गडकरी ने 52 वर्ष की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था. इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी केवल 43 वर्ष की उम्र में पहली बार 1968 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने थे. जबकि लाल कृष्ण आडवाणी 1973 में 45 वर्ष की उम्र में पहली बार भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष बने थे. लेकिन नितिन BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बन सकते हैं. नितिन नबीन से पहले भी भारतीय जनता पार्टी ने नेता चुनने के मामले में कई बार चौंकाया है. कई बार भाजपा ने राज्यों में मुख्यमंत्री पद के लिए ऐसे नाम चुने हैं, जो राजनीतिक दौड़ में नहीं थे या जिनका नाम मीडिया में प्रमुखता से नहीं चल रहा था.

BJP में चौंकाने वाले फैसलों की शुरुआत पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई. इसका सबसे पहला और बड़ा उदाहरण मनोहरलाल खट्टर को हरियाणा सीएम के रूप में चुना जाना था. 2014 के मोदी लहर में भाजपा लोकसभा के साथ-साथ हरियाणा में भी जीती थी. हरियाणा में मिली जीत के बाद सीएम फेस की तलाश जारी थी, तब कई नेताओं के नाम आए, लेकिन पार्टी ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाना. मनोहर लाल को जब सीएम बनाने की घोषणा की गई तब वो राज्य की राजनीति में कोई बड़ा चेहरा नहीं थे. 2017 में जब यूपी में बीजेपी जीती, तब योगी गोरखपुर के सांसद थे. सदन में उनकी गिनती बीजेपी के फायरब्रांड नेता के रूप में होती थी. उस समय यूपी में सीएम के रूप में मनोज सिन्हा का सबसे आगे चल रहा था. लेकिन पार्टी ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया. आज योगी की गिनती सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में की जाती है. उनके नेतृत्व में पार्टी दूसरी बार सत्ता संभाल चुकी है. बीते कुछ दशक से गुजरात भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ रहा है. इस समय पार्टी के दो सबसे प्रमुख नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी गुजरात से आते हैं. साल 2021 में गुजरात में भाजपा ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को छोड़कर, उपमुख्यमंत्री सहित पूरे मंत्रिमंडल को बदल दिया. इसका फायदा यह हुआ कि अगली बार राज्य में हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी जीत दर्ज की. साल 2021 में भाजपा ने एक ही साल के भीतर दो बार मुख्यमंत्री बदले. पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया, और फिर कुछ ही महीनों बाद तीरथ सिंह रावत को हटाकर पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया. आज पुष्कर सिंह धामी भाजपा के लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में से एक हैं. महाराष्ट्र में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी पार्टी बनने के बाद भी भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया. खुद की पार्टी के कद्दावर नेता देवेंद्र फडणवीस को उपमुख्यमंत्री का पद लेने का निर्देश दिया. इससे पार्टी ने यह मैसेज दिया कि हम अपने सहयोगियों को भी आगे बढ़ाते हैं. हालांकि अगली बार महाराष्ट्र में चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम बनाया. 2023 के अंत में राज्स्थान में भाजपा ने कांग्रेस को बड़ी शिकस्त दी. उस समय राजस्थान में वसुधरा राजे पार्टी की सबसे बड़ी नेता थी. वसुंधरा राजे का नाम सीएम रेस में सबसे आगे चल रहा था. लेकिन राजनाथ सिंह ने विधायक दल की बैठक में वसुंधरा राजे को एक पर्ची दी और भजनलाल शर्मा को राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए. साल 2023 में राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी भाजपा ने नेता चुनने के मामले में चौंकाने वाला फैसला लिया. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की. माना यह जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान भी राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए मोहन यादव को सीएम बनाया. इसी साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भी भाजपा ने नेता चुनने के मामले में चौंकाया. आम आदमी पार्टी को करारी शिकस्त देने के बाद भाजपा से परवेश सिंह साहिब सहित कई अन्य नेताओं के नाम की चर्चा थी, लेकिन भाजपा ने चौंकाते हुए रेखा गुप्ता को सीएम बनाया. रेखा गुप्ता पहली बार की विधायक बनी और पहली बार में ही पार्टी ने उन्हें सीएम बनाया. गुजरात (भूपेंद्र पटेल), उत्तराखंड (पुष्कर सिंह धामी), और त्रिपुरा (माणिक साहा) जैसे राज्यों में भी ऐसे नेताओं को मौका दिया गया जो अचानक सुर्खियों में आए. प्रह्लाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, नरेंद्र सिंह तोमर जो केन्द्र में मंत्री थे, उन्हें विधानसभा का टिकट दे दिया. नेता चुनने के अलावा बीजेपी ने कई रणनीतिक फैसले भी चौंकाने वाले लिए हैं. पहलगाम हमले के बाद जब पूरा देश पाकिस्तान पर स्ट्राइक की चर्चा कर रहा था तब भाजपा ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए देश में जातिगत गणना कराने की घोषणा की थी.

Written By
Aagaaz Express

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *