बीजेपी की टीम में ब्राह्मणों को मिला कम प्रतिनिधित्व,महिलाओं को पार्टी ने दी इतनी हिस्सेदारी

लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत अटकलों और लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की बैठकों के बाद घोषित टीम पर प्रभावशाली नेताओं के सामंजस्य, समझौते और संतुलन की स्पष्ट छाया दिख रही है। नए-पुराने चेहरों के मिश्रण और कुछ चौंकाने वाले नामों के साथ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास तो किया गया है, लेकिन यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। दूसरे दलों से आने वालों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।विधानसभा चुनाव के शंखनाद में बमुश्किल छह माह का समय बचा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने करीब छह महीने की मशक्कत के बाद वर्षों से पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को हटाकर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की है। कुछ पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर भी टीम में उत्साह और कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को उड़ान देने का प्रयास है।

उन्होंने जिस टीम के सहारे 2027 विधानसभा चुनाव साधने की तैयारी की है उसमें कुछ ऐसे चेहरों को वे जगह देने से रोक नहीं पाए हैं जो उनकी इस टीम के लिए तीखी आलोचना का आधार तैयार करते हैं।प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 12 से 14 फीसदी तक मानी जाती है जबकि भूमिहार या त्यागी 1 फीसदी हैं। नई टीम में आबादी के लिहाज से ब्राह्मणों को कम और भूमिहारों को ज्यादा महत्व दिया गया है। नए घोषित पदाधिकारियों को मिलाकर 48 सदस्यीय टीम में चार भूमिहार पदाधिकारी बनाए गए हैं। ब्राह्मणों को आबादी के लिहाज से कम प्रतिनिधित्व मिला है।भाजपा के महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के संकल्प को देखते हुए पंकज चौधरी की नई टीम में महिलाएं भी अपेक्षा के अनुसार हिस्सेदारी पाने में पीछे रह गईं। टीम में सिर्फ 12 महिलाओं को ही जगह मिल सकी है जबकि 33 प्रतिशत की कसौटी पर इन्हें 16 स्थान मिलने चाहिए थे।

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