NRI से अब प्रॉपर्टी खरीदना होगा आसान,जानें नए नियम से क्या होगा बदलाव?

भारत में रहने वाले लोगों के लिए NRI से प्रॉपर्टी खरीदना अब आसान होने वाला है. सरकार ने एक अहम बदलाव करते हुए तय किया है कि 1 अक्टूबर 2026 से ऐसे ट्रांजैक्शन में टैक्स डिडक्शन एंड कलैक्शन अकाउंट नंबर (TAN) लेना जरूरी नहीं होगा. इससे प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी.मौजूदा नियमों के तहत, अगर कोई व्यक्ति भारत में रहने वाले दूसरे व्यक्ति से प्रॉपर्टी खरीदता है, तो उसे TAN की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर वही प्रॉपर्टी किसी NRI से खरीदी जाती है, तो खरीदार को TDS काटने के लिए TAN लेना अनिवार्य होता था. यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जटिल मानी जाती थी.TAN एक 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक नंबर होता है, जो टैक्स काटने और जमा करने के लिए जरूरी होता है. इसे लेने के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था, जिससे एक बार के ट्रांजैक्शन में भी लोगों को अतिरिक्त औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता था.नए नियम के तहत अब व्यक्तिगत खरीदार और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को TAN लेने से छूट दी गई है. अब खरीदार PAN के जरिए ही टैक्स जमा कर सकेंगे, जैसा कि सामान्य प्रॉपर्टी खरीद में होता है. इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा आसान और यूजर-फ्रेंडली हो जाएगी.इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि TDS खत्म हो गया है. प्रॉपर्टी खरीदते समय खरीदार को अब भी टैक्स काटना और समय पर जमा करना होगा.

टैक्स दरें भी पहले की तरह लागू रहेंगी. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर करीब 12.5% और शॉर्ट टर्म गेन पर स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा.सरकार ने साफ किया है कि इस बदलाव से ट्रांजैक्शन की पारदर्शिता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. खरीदार और विक्रेता दोनों के PAN के जरिए रिकॉर्ड रखा जाएगा और टैक्स क्रेडिट संबंधित फॉर्म्स और AIS में दिखता रहेगा.हालांकि, NRI विक्रेताओं के लिए एक समस्या अभी भी बनी हुई है. TDS पूरे सौदे की रकम पर काटा जाता है, न कि केवल मुनाफे पर. इससे उनका काफी पैसा कुछ समय के लिए अटक सकता है, जब तक टैक्स रिफंड प्रोसेस नहीं हो जाता.कुल मिलाकर, यह बदलाव रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. इससे NRI प्रॉपर्टी डील्स में तेजी आ सकती है और खरीदारों के लिए प्रक्रिया कम जटिल हो जाएगी.

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