महिला आरक्षण बिल को लेकर बीते कुछ दिनों से देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित एनडीए के अन्य सहयोगी दल कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसे विपक्षी दलों पर तीखे हमले कर रहे हैं. जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन हो रहा है. इन विरोध-प्रदर्शनों की सबसे खास बात यह है कि हर जगह महिलाओं को आगे से नेतृत्व करने का मौका दिया जा रहा है. पार्टी दफ्तर में प्रेस कॉफ्रेंस हो या सड़क पर जनाक्रोश मार्च, ज्यादातर महिलाएं ही नजर आ रही हैं. सोमवार को भी पटना में एनडीए की महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जनाक्रोश मार्च निकाला. अब कांग्रेस BJP सहित NDA को उसी की भाषा में जवाब देने जा रही है. महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर हमलावर बीजेपी पर पलटवार करने के लिए कांग्रेस ने देश भर में प्रेस कांफ्रेंस करने की रणनीति तैयार की है. मंगलवार को कांग्रेस की प्रमुख महिला नेता 25 शहरों में प्रेस कांफ्रेंस कर पार्टी का रूख स्पष्ट करेंगी.मंगलवार को चंडीगढ़ में कुमारी सैलजा, दिल्ली में शोभा ओजा, देहावसान में सुप्रिया श्रीनेत, जयपुर में अलका लांबा, मुंबई में अमी याग्निक, रायपुर में रंजीता रंजन, अहमदाबाद में रजनी पाटिल, लखनऊ में परिणति शिंदे, पटना में दीपिका पांडे, भोपाल में रागिनी नायक, वाराणसी में नेटा डिसूजा प्रेस कांफ्रेंस करेंगी. इसके बाद कांग्रेस नेता जिला स्तर पर प्रेस कांफ्रेंस करेंगे. इसको लेकर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने निर्देश जारी किए हैं.

पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया है कि संसद सत्र के दौरान प्रियंका गांधी के भाषण और उनके प्रेस कांफ्रेंस के संदेश को लोगों को बताएं. मंगलवार को होने वाली प्रेस कांफ्रेंस से पहले सभी संबंधित नेताओं के साथ पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ऑनलाइन बैठक की जिसमें प्रियंका गांधी के साथ ही महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सोनिया गांधी के लेख को लेकर भी जानकारी दी गई.मालूम हो कि संसद में महिला आरक्षण बिल की हार चुकी लड़ाई बीजेपी सड़कों पर ले आई है. देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ, पटना, बेंगलुरु सहित कई शहरों में बीजेपी की महिला नेता कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं.पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलने पर खुशी मना रहे हैं, जबकि विभिन्न दलों की महिला नेता दशकों से इसकी मांग कर रही थीं.उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस पार्टी ने गर्व से मुस्कुराते हुए, मेजें थपथपा कर, आम महिलाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को कुचले जाने का जश्न मनाया. कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस बात का जश्न मनाया कि जिन महिलाओं ने वर्षों तक राजनीति में संघर्ष किया है और जो संसद में केवल 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रही थीं, उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया.”