सीमित बजट में जीवन यापन करने वाले इन छात्रों के लिए अब न सिर्फ महंगा गैस सिलिंडर खरीदना मुश्किल हो गया है, बल्कि समय पर सिलिंडर न मिलना भी उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है।एलपीजी सिलिंडर की बढ़ती कीमतों का असर अब दूसरे राज्यों से दिल्ली आकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ रहा हैं। सीमित बजट में जीवन यापन करने वाले इन छात्रों के लिए अब न सिर्फ महंगा गैस सिलिंडर खरीदना मुश्किल हो गया है, बल्कि समय पर सिलिंडर न मिलना भी उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है।मुखर्जी नगर, कटवारिया सराय, लक्ष्मी नगर और साकेत समेत कई इलाकों में रहने वाले छात्र सिलिंडर की बढ़ी कीमतों से परेशान हैं। यूपीएससी और एसएससी अभ्यर्थियों के अनुसार, बुकिंग के बाद भी सिलिंडर 5 से 7 दिन की देरी से मिल रहा है। ऐसे में उन्हें या तो महंगे दामों पर प्राइवेट सप्लायर से सिलिंडर लेना पड़ रहा है या फिर अस्थायी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ता है।बिहार से आकर मुखर्जी नगर में तैयारी कर रहे छात्र रवि ने बताया कि सिलिंडर खत्म होने के बाद उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने बाहर खाना खाया, जिससे उनका खर्च दोगुना हो गया। वहीं, राजस्थान से आए अन्य छात्र मनोज ने बताया कि कुछ स्थानीय विक्रेता मौके का फायदा उठाकर सिलिंडर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अधिकांश छात्र पहले से ही सीमित संसाधनों में जीवन यापन करते हैं। गैस की बढ़ती कीमत और आपूर्ति में अनियमितता ने उनके मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कई छात्र अब खाना बनाने के बजाय सस्ते ढाबों या टिफिन सेवाओं पर निर्भर हो रहे हैं, जो लंबे समय में उनकी सेहत पर असर डाल रहा है। छात्रों के अनुसार, यह समस्या केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक तनाव का कारण भी बन रही है। पढ़ाई के महत्वपूर्ण समय में रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर चिंता उनकी एकाग्रता को प्रभावित कर रही है।स्थिति से निपटने के लिए कुछ छात्र इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रिक कुकर और साझा रसोई जैसे विकल्प अपना रहे हैं। हालांकि, बिजली के बढ़ते बिल और उपकरणों की लागत के कारण ये विकल्प भी सभी के लिए आसान नहीं हैं। कई छात्र मिलकर एक ही सिलिंडर का उपयोग कर रहे हैं, ताकि खर्च को बांटा जा सके। वहीं,गैस की बढ़ती कीमत और आपूर्ति की समस्या का असर स्थानीय खाद्य बाजार पर भी साफ दिख रहा है। ढाबों और छोटे रेस्तरां को भी समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे लागत बढ़ रही है। यही वजह है कि खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।गैस की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की थाली पर साफ दिखाई देने लगा है। सिलिंडर महंगे होने के कारण अधिकतर जगह खाने-पीने की चीजें पहले से काफी महंगी हो गई हैं। चाय, रोटी, दाल, सब्जी से लेकर स्नैक्स तक, लगभग हर चीज के दाम बढ़ चुके हैं।

पहले ढाबों पर 5 रुपये में मिलने वाली रोटी अब 10 से 12 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, 80 रुपये की दाल अब 100 से 120 रुपये में बिक रही है। सस्ते में मिलने वाली थाली भी महंगी हो गई है, जो थाली पहले 40 रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब 70 से 80 रुपये हो गई है। वहीं, डोसा, सांभर, बड़ा, उत्तपम और चाउमीन के दामों में भी 10 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।चाय की कीमत भी बढ़ गई है। कुछ जगहों पर कप का साइज भी छोटा कर दिया गया है।राजधानी में एलपीजी गैस सिलिंडर की बुकिंग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पीएनजी की सुविधा जिन इलाकों में पहुंच चुकी है, वहां उपभोक्ता सिलिंडर के झंझट से बचने के लिए इस विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं। अधिकतर एजेंसी संचालकों के अनुसार, गैस सिलिंडर की बुकिंग में गिरावट आई है।घरेलू ईंधन के क्षेत्र में पीएनजी लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। उत्तम नगर निवासी निशा ने बताया कि हमारे यहां आईजीएल की पाइप लग गई है। अब जल्द ही कनेक्शन मिल जाएगा। उन्होंने खुशी जताते हुए बताया कि सिलिंडर की बुकिंग और लेट डिलीवरी से अब छुटकारा मिलेगा। आरके पुरम निवासी वरुण ने बताया कि पहले जहां लोग एलपीजी सिलिंडर पर निर्भर थे, वहीं अब पीएनजी ने उनकी जगह लेनी शुरू कर दी है। आईजीएल से जुड़े अमनदीप ने बताया कि पिछले कुछ समय में कनेक्शन के लिए पूछताछ और आवेदन में वृद्धि हुई है। लोग अपने घरों में स्थायी गैस सुविधा चाहते हैं, जिससे उनका समय और मेहनत दोनों बच सके। साफ, सुरक्षित और सुविधाजनक होने के कारण लोग तेजी से पीएनजीकनेक्शन की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में अब आईजीएल के कॉल सेंटर पर कनेक्शन के लिए लगातार कॉल बढ़ रहे हैं।मार्च महीने में करीब 3.42 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। दिल्ली-एनसीआर में भी लगातार नए इलाकों को इस सुविधा से जोड़ा जा रहा है। प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और जागरूकता बढ़ाकर एलपीजी से पीएनजी की ओर बदलाव को प्रोत्साहित किया जा रहा है।पर्यावरण विशेषज्ञ संजय मिश्रा ने बताया कि पीएनजी को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन माना जाता है। यह एलपीजी और अन्य पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है। इसके उपयोग में बढ़ोतरी से न केवल घरेलू स्तर पर सुविधा बढ़ेगी, बल्कि वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी। खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।