असम में ऐसे चला बीजेपी का जादू,जानिए विपक्ष आखिर क्यों हुआ पस्त?

इस चुनाव में भाजपा ने पूरी तरह फ्रंटफुट पर खेलते हुए आक्रामक रणनीति अपनाई। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने हर रैली और जनसभा में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया और मुद्दों को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से पेश किया। भाजपा ने पहचान और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। विपक्ष को अस्थिर और दिशाहीन बताया।असम विधानसभा चुनाव के रुझानों ने राज्य की राजनीति को लेकर एक स्पष्ट और निर्णायक संदेश दिया है। यह जनादेश सिर्फ सत्ता में वापसी का नहीं, बल्कि विकास और वेलफेयर मॉडल पर जनता की ठोस मुहर है। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का लगातार तीसरी बार सरकार बनाना इस बात का संकेत है कि मतदाताओं ने स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी है। मामा के नाम से मशहूर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का विकास मॉडल इस चुनाव में साफ तौर पर जनता के सिर चढ़कर बोलता नजर आया।मामा मॉडल, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच और जमीनी विकास का संतुलित मेल है, ने मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई। इस बार चुनाव में पारंपरिक जातीय, क्षेत्रीय और भावनात्मक मुद्दे पीछे छूटते नजर आए, जबकि काम, कल्याण और दिखने वाला विकास केंद्र में रहा। गांव से शहर तक, महिला से युवा मतदाता तक, हर वर्ग ने सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं और बुनियादी ढांचे में आए बदलाव को ध्यान में रखकर मतदान किया। यही वजह है कि पूरे असम ने विकास मॉडल के पक्ष में सामूहिक जनादेश देते हुए यह साफ कर दिया है कि अब राजनीति का केंद्र वादों से ज्यादा उनके जमीनी असर पर टिका है।चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की आशीर्वाद यात्रा एनडीए के लिए निर्णायक साबित हुई। इस यात्रा में सरमा ने राज्य के लगभग हर क्षेत्र को कवर किया। यह सिर्फ एक राजनीतिक रैली नहीं थी, बल्कि इसने एक फीडबैक मिशन की तरह काम किया। यात्रा के दौरान सरमा ने गांव-गांव जाकर योजनाओं का असर समझा, स्थानीय समस्याएं सुनीं और मौके पर समाधान का भरोसा दिया। इससे सरकार और जनता के बीच दूरी काफी कम हुई। चुनावी नजरिए से देखें तो इस यात्रा ने एनडीए को एक मजबूत ग्राउंड नेटवर्क और माहौल दोनों दिया।असम में एनडीए की जीत की सबसे मजबूत नींव उसकी वेलफेयर पॉलिसी रही, जिसे सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जमीनी स्तर तक पहुंचाया गया। हिमंत सरकार ने खासतौर पर गरीब, महिला और ग्रामीण वर्ग को सीधे लक्षित किया। ओरुनोदोई योजना इस मॉडल का केंद्र रही, जिसके तहत लाखों महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे पैसे भेजे गए। इससे न सिर्फ आर्थिक राहत मिली, बल्कि महिलाओं का सरकार पर भरोसा भी बढ़ा। स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा और स्कॉलरशिप, चाय बागान मजदूरों के लिए विशेष पैकेज और स्वास्थ्य योजनाओं के जरिये मुफ्त इलाज जैसी पहल ने अलग-अलग वर्गों को जोड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह सीधा लाभ पहुंचाने के साथ भावनात्मक जुड़ाव का मेल था, जिसने वोटों को एनडीए की ओर मोड़ा।इस चुनाव में भाजपा ने पूरी तरह फ्रंटफुट पर खेलते हुए आक्रामक रणनीति अपनाई। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने हर रैली और जनसभा में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया और मुद्दों को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से पेश किया। भाजपा ने पहचान और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। विपक्ष को अस्थिर और दिशाहीन बताया। हिंदू वोटों का व्यापक ध्रुवीकरण हुआ। इस रणनीति ने चुनाव को पूरी तरह एनडीए बनाम विपक्ष के सीधे मुकाबले में बदल दिया, जिसमें एनडीए भारी पड़ा।असम में विकास सिर्फ वादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को जमीनी स्तर पर दिखा। नई सड़कें, पुल से कनेक्टिविटी बेहतर हुई।

औद्योगिक निवेश से रोजगार के अवसर बढ़े। लॉजिस्टिक्स हब के रूप में असम की पहचान बनी। साथ ही, कानून-व्यवस्था में सुधार जैसे बदलावों ने खासकर युवा और शहरी मतदाताओं को प्रभावित किया। राजनीतिक तौर पर यह एक बड़ा बदलाव था, जहां मतदाता अब विकास का अनुभव करने के बाद वोट दे रहा है।2026 का विधानसभा चुनाव परिसीमन के बाद पहला चुनाव है। इसका असर सीधे नतीजों में दिखा। नई सीमाओं ने कई सीटों का सामाजिक समीकरण बदल दिया। कुछ क्षेत्रों में नए मतदाता जुड़े, जबकि पुराने वोट बैंक कमजोर हुए। ऊपरी असम में कांग्रेस का पारंपरिक आधार प्रभावित हुआ, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि परिसीमन ने एनडीए को संरचनात्मक लाभ पहुंचाया है।रणनीति बनाने से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव में कई स्तरों पर कमजोर नजर आए। कोई स्पष्ट विजन या नैरेटिव नहीं होना, जमीनी संगठन कमजोर होना, पारंपरिक वोट बैंक में गिरावट, गठबंधन के बावजूद तालमेल की कमी विपक्ष पर भारी पड़ी। विपक्ष मुद्दे उठाने में तो सफल रहा, लेकिन उन्हें वोट में बदलने में पूरी तरह असफल रहा।

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