बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर नीतीश कुमार का गृह प्रवेश,’7 सर्कुलर रोड’ है नया स्थायी पता

बिहार की राजनीति में दशकों तक सत्ता का केंद्र रहा ‘1 अणे मार्ग’ आज एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री आवास खाली कर रहे हैं. बिहार की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में जाने के बाद से ही इस बंगले को खाली करने की चर्चाएं तेज थीं, जिस पर आज अंतिम मुहर लग गई है.नीतीश कुमार ने अपने नए आवास में शिफ्ट होने के लिए बुद्ध पूर्णिमा के पवित्र दिन को चुना है. आज सुबह से ही उनके निजी सामानों को ‘1 अणे मार्ग’ से निकालकर ‘7 सर्कुलर रोड’ स्थित नए बंगले में ले जाने का सिलसिला जारी है. माना जा रहा है कि शुभ मुहूर्त और बुद्ध पूर्णिमा की महत्ता को देखते हुए उन्होंने आज ही पूर्ण रूप से शिफ्ट होने का निर्णय लिया.मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने ‘1 अणे मार्ग’ में कई साल बिताए. यह बंगला न केवल उनका निवास था, बल्कि बिहार के कई ऐतिहासिक फैसलों और राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र भी रहा. आज जब उनका सामान ट्रकों और गाड़ियों के जरिए बाहर निकल रहा है, तो यह उनके लंबे मुख्यमंत्री काल के एक अध्याय के समाप्त होने जैसा है.अब नीतीश कुमार का नया ठिकाना ‘7 सर्कुलर रोड’ होगा. दिलचस्प बात यह है कि इस आवास का आवंटन विभाग द्वारा तब ही कर दिया गया था जब वे मुख्यमंत्री पद पर आसीन थे. इस बंगले को पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा और गरिमा के अनुरूप पहले ही तैयार कर लिया गया था, ताकि पद छोड़ने के बाद उन्हें रहने में कोई असुविधा न हो.पिछले कुछ दिनों से धीरे-धीरे सामान भेजने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन आज इसमें तेजी देखी गई. उनके निजी फर्नीचर, किताबें और अन्य जरूरी सामानों को बेहद सावधानी से नए आवास में पहुंचाया जा रहा है.

सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में पूरा स्थानांतरण कार्य किया जा रहा है ताकि शाम तक सब कुछ व्यवस्थित हो सके.सूत्रों और मिल रही खबरों के अनुसार, नीतीश कुमार आज देर शाम तक स्वयं ‘7 सर्कुलर रोड’ में प्रवेश कर जाएंगे. नए आवास में उनके रहने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. आज की रात वे मुख्यमंत्री आवास के बजाय अपने नए आवंटित बंगले में बिताएंगे, जो अब बिहार की राजनीति में उनकी नई गतिविधियों का केंद्र बनेगा.नीतीश कुमार के आवास खाली करने के साथ ही अब नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘1 अणे मार्ग’ में आने का रास्ता साफ हो गया है. सत्ता हस्तांतरण की यह प्रक्रिया अब भौतिक रूप से भी पूर्ण होती दिख रही है. बिहार की जनता और राजनीतिक गलियारों में इस ‘शिफ्टिंग’ को एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.

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