सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. सूर्य ग्रहण अमावस्या तो चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि के दिन लगता है. साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन माह की अमावस्या के दिन 17 फरवरी को लगा था. खगोल विज्ञान में सूर्य और चंद्र ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना मानी जाती है. सूर्य को ग्रहण तब लगता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है और सूर्य की रौशनी पृथ्वी पर नहीं आ पाती. साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा.हालांंकि, इस साल लगने वाले सूर्य ग्रहण से ज्यादा चर्चा उस ग्रहण की जा रही है, जो साल 2027 यानी अगले साल सूर्य को लगने वाला है. कहा जा रहा है कि साल 2027 में लगने वाला ये सूर्य ग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा और दुर्लभ सूर्य ग्रहण होगा. इस दौरान दिन में 6 मिनट 20 से 23 सेकेंड तक आसमान गहरा अंधेरा नजर आएगा. सूर्य को ये ग्रहण अगले साल 02 अगस्त को लगेगा. सामान्यतः पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव 2 से 3 मिनट तक ही रहता है, लेकिन अगले साल यह समय दोगुने से भी अधिक होगा. इसी वजह से इसे सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण कहा जा रहा है.सूर्य ग्रहण की इस लंबाई के पीछे की वजह खगोल विज्ञान से जुड़ी है. चंद्रमा के सूर्य और पृथ्वी के बीच आने पर सूर्य ग्रहण की घटना होती है. ऐसे समय पर चंद्रमा द्वारा सूर्य के कोरोना को कुछ समय के लिए ढक लिया जाता है, जिससे दिन में सूर्य की रौशनी नजर नहीं आती है. चंद्रमा, पृथ्वी के जितना करीब होता है, ग्रहण की अवधि उतनी ही लंबी होती है.

2 अगस्त 2027 को चंद्रमा अपने पेरिजी (जो चंद्रमा का धरती के पास करीबी बिंदू है) के नजदीक होगा. इस वजह से चंद्रमा इतना बड़ा दिखेगा कि वो सूर्य कोअसामान्य रूप से लंबे समय तक पूरी तरह से ढक लेगा.भारत में यह घटना केवल आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में ही नजर आएगी. ऐसे में भारत में इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा. सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है. इस दौरान ग्रहण के सभी नियमों का पालन किया जाएगा. इस दौरान मंदिरों के कपाट और भगवान की पूजा भी बंद हो जाएगी.यह ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में साफ नजर आएगा. खासतौर पर दक्षिणी यूरोप (स्पेन, पुर्तगाल), उत्तरी अफ्रीका (मिस्र, लीबिया), मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई) में यह नजारा दिखेगा.