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बिहार में खतरे में है 50,000 से अधिक लोगों की नौकरियां,प्राइवेट एग्जाम सेंटर वालों की स्थिति हुई बुरी!

बिहार में खतरे में है 50,000 से अधिक लोगों की नौकरियां,प्राइवेट एग्जाम सेंटर वालों की स्थिति हुई बुरी!
  • PublishedJanuary 14, 2026

बिहार ऑनलाइन केंद्र संगठन में राज्य सरकार से गुहार लगाई है. संगठन का कहना है कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की परीक्षा नीति के कारण प्रदेश की लगभग 200 ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर का अस्तित्व संकट में आ गया है.मंगलवार को राजधानी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के प्रेसिडेंट कन्हैया सिंह ने कहा कि बिहार सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा बनाए गए बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्रों में करीब साढ़े 11 हजार कंप्यूटर लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा हाल ही में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा 10 हजार नए कंप्यूटर लगाने का टेंडर जारी किया गया है.बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्र पीपीपी मोड पर बनाए गए हैं. यानी सरकार ने इन केंद्रों का संचालन बड़ी निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिया है. इसका मतलब यह है कि सरकारी नाम पर चल रहे हैं. यह केंद्र भी वास्तव में निजी कंपनियों के माध्यम सही संचालित हो रहे हैं.कन्हैया सिंह ने कहा कि राज्य में लगभग 250 निजी परीक्षा केंद्र है.

जिनमें लगभग 15,000 कंप्यूटर उपलब्ध है. कई ऐसे भी केंद्र है जो पिछले 15-16 सालों से सफलतापूर्वक परीक्षाएं आयोजित कर रहे हैं. जब राज्य में कोई सरकारी परीक्षा केंद्र नहीं था तब निजी केंद्रों ने अपने संसाधन के दम पर बिहार में ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली पद्धति को खड़ा किया था. लेकिन आज सरकारी नाम से चल रहे पीपीपी मोड के परीक्षा केंद्रों को अब पूरी तरीके से व्यावसायिक बना दिया गया है.केंद्र व राज्य सरकार की लगभग सभी परीक्षाएं उनमें कराई जा रही है. इसका सीधा असर निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों पर पड़ा है और लगभग 50,000 से अधिक लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है.कन्हैया सिंह का कहना था कि पिछले 14-15 सालों से राज्य के निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों के द्वारा जेईई मेन और एडवांस, एसएससी, रेलवे, नीट पीजी, गेट, डीआरडीओ, डीसीएल आईबीपीएस जैसी कई प्रतिष्ठित कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को सफलतापूर्वक आयोजित किया जाता रहा है. उद्देश्य यही होता है कि परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी हो लेकिन सरकारी स्तर पर जो कदम उठाए गए हैं और जिस तरीके से पीपीपी मोड में बड़ी निजी कंपनियों को परीक्षा केंद्र चलाने का मौका दिया जा रहा है. इससे राज्य में पूर्व से कार्यरत ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो गया है.वर्तमान में बिहार सरकार का एक भी एग्जाम निजी परीक्षा केंद्र पर नहीं हो रहा है. ऐसे में निजी परीक्षा केंद्र संचालकों ने सीएम नीतीश कुमार से अपील है कि वह उचित निर्णय लें ताकि उन लोगों का भविष्य सुरक्षित रहे.

Written By
Aagaaz Express

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