नालंदा की धरती इन दिनों सिर्फ फसलों से नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनावी जोश से भी लहलहा रही है। धान की खुशबू में अब राजनीति की महक घुल गई है, चौपालों पर बहस, गलियों में चर्चाएं और हर दिल में एक ही सवाल गूंज रहा है, “इस बार सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी?” जब अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ नालंदा पहुंचा, तो लगा मानो लोकतंत्र की धड़कन यहीं सबसे तेज चल रही हो। कहीं उम्मीदों की आहट है, कहीं नारों की आवाज, और बीच में जनता, जो अपने वोट से बिहार के भविष्य की नई कहानी लिखने को तैयार है। वैसे भी नालंदा ज्ञान की भूमि रही है। सियासी रूप से देखें तो लंबे वक्त से सीएम नीतीश कुमार का यह क्षेत्र गढ़ रहा है।सुबह चाय की चर्चा पर यहां के स्थानीय निवासी अर्पित कुमार सिन्हा कहते हैं कि कोई संशय नहीं है। एनडीए के प्रत्याशी की जीत तय है। केंद्र में एनडीए की सरकार है। यहां लंबे समय से नीतीश का प्रभाव रहा है। काम भी बहुत हुआ है। सड़कें अच्छी बनी हैं। विकास लोगों को दिखता है, इसमें कोई संशय नहीं है। पूरे बिहार में यातायात के लिए रोड की जरूरत थी, डबल इंजन की सरकार ने इसे पूरा किया है। पहले हम सड़कों पर चलते थे तो शाम तक जिला और राज्य मुख्यालय पर नहीं पहुंच पाते थे। आज तीन से चार घंटे में आप कहीं भी पहुंच सकते हैं।

रोजगार के मुद्दों पर सिन्हा कहते हैं कि रोजगार का सृजन हुआ है। मेरे मोहल्ले में 50 लोगों को काम मिला है। एनडीए का दबदबा है।वहीं, अरुण कुमार कहते हैं कि यहां NDA के आलावा कोई नहीं दिख रहा है। अच्छी सरकार है। और इससे अच्छी कोई सरकार समझ में हमें नहीं आता है। लालू राज जैसे बुरे दिन हमने नहीं देखेगा। अगर नीतीश रहेंगे तो आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होगा। लालू का सरकार लाठी की सरकार है। हम अब नहीं चाहते हैं कि उनकी सरकार आए। हम देख रहे हैं कि जो योग्य है वो कहीं न कहीं नौकरी पा ही लेता है। नौकरी करने में पलायन क्या बात है? यदि आप केंद्र के साथ काम करेंगे तो क्या दूसरे राज्य नहीं जाएंगे आप? तो ये कैसे पलायन हुआ।चाय पर चर्चा करते हुए प्रह्लाद कहते हैं कि नीतीश जो भी काम कर रहे हैं, वो अच्छा कर रहे हैं। अब डर नहीं है। बेटियां आराम से घर आ-जा रही हैं। एकदम घूमिए, पूरी आज़ादी है। कहीं डर नहीं है। नीतीश की उम्र को लेकर किए गए सवाल पर वो कहते हैं कि नीतीश सिर का ताज हैं, शान हैं। महिलाएं और बेटियां सब खुश हैं। दस-दस हजार रुपये जो मिल रहे हैं, उसको रिश्वत जो कह रहे हैं, उन्हें कहने दीजिए। जिसको जो मिलना है, वो मिलेगा।