मनरेगा के नए अवतार पर शुरू हुआ सियासी टकराव,मोदी सरकार ने बदला कई योजनाओं का नाम

संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा में जैसे ही मनरेगा से जुड़ा नया विधेयक पेश हुआ, सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई. रोजगार की गारंटी देने वाली देश की सबसे बड़ी ग्रामीण योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव का प्रस्ताव सामने आते ही विपक्ष ने इसे सरकार की ‘नाम बदलो नीति’ करार दिया, जबकि सरकार ने इसे बदलते भारत की जरूरत बताया. दरअसल यह बहस सिर्फ एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यापक राजनीतिक और वैचारिक बदलाव का हिस्सा है, जिसमें पिछले एक दशक में कई पुरानी योजनाओं, सड़कों, संस्थानों और कानूनों को नए नाम और नई पहचान दी गई है.कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि मोदी सरकार ने UPA शासनकाल में शुरू की गई 25 से अधिक योजनाओं और परियोजनाओं के नाम बदल दिए या उन्हें नए ब्रांड के तहत पेश किया. कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने की कवायद नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत को मिटाने की कोशिश है. वहीं सरकार का तर्क है कि नाम के साथ-साथ योजनाओं का दायरा, लक्ष्य और कार्यप्रणाली भी बदली गई है, इसलिए नया नाम स्वाभाविक है.महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है, की शुरुआत साल 2005 में UPA सरकार के दौरान हुई थी. यह योजना ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी देती है. अब मोदी सरकार ने इसे नए कानून ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ यानी VBG RAM G के रूप में पेश किया है. सरकार का दावा है कि इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक काम की गारंटी मिलेगी और फोकस सिर्फ मजदूरी तक सीमित न होकर ग्रामीण अधोसंरचना, जल सुरक्षा और आजीविका और जलवायु अनुकूल विकास पर होगा. विपक्ष इसे मनरेगा की आत्मा से छेड़छाड़ बता रहा है, जबकि सरकार इसे ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जोड़ रही है.UPA की 28 योजनाओं के बदले गए नाम?विपक्ष का अरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले 11 सालों में 28 योजनाओं का नाम बदला है. आइए जानते हैं कांग्रेस सरकार की उन योजनाओं के बारे में जिनके अब तक बदल चुके हैं ।गरीबों को पक्का घर देने के उद्देश्य से 1985 में शुरू हुई इंदिरा आवास योजना UPA शासनकाल में एक प्रमुख सामाजिक योजना रही. साल 2016 में मोदी सरकार ने इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए PMAY-G और शहरी इलाकों के लिए PMAY-Urban के रूप में इसे दो हिस्सों में लागू किया गया. सरकार का कहना है कि ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ के लक्ष्य के तहत इस योजना के वित्तीय और तकनीकी ढांचे में बड़े बदलाव किए गए, इसलिए नया नाम जरूरी था.जेएनएनयूआरएम से अमृत मिशनशहरों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 2005 में शुरू हुआ जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन, UPA सरकार की एक अहम योजना थी. 2015 में इसका नाम बदलकर अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन यानी AMRUT कर दिया गया. सरकार के मुताबिक, शहरी विकास के नए लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया.राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का बदला नामग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए 2005 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना शुरू की गई थी. 2015 में मोदी सरकार ने इसका नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया. सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत वितरण ढांचे को मजबूत करने और 24×7 बिजली आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया गया.निर्मल भारत अभियान से स्वच्छ भारत मिशनग्रामीण स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए UPA सरकार ने निर्मल ग्राम पुरस्कार और निर्मल भारत अभियान की शुरुआत की थी. 2014 में मोदी सरकार ने इसे स्वच्छ भारत मिशन के रूप में नया नाम और नई पहचान दी. इस मिशन में गांवों के साथ-साथ शहरों को भी शामिल किया गया और इसे जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई.गरीब ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 2011 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शुरू किया गया था. साल 2016 में इसका नाम बदलकर दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कर दिया गया. सरकार का कहना है कि अंत्योदय के सिद्धांत को केंद्र में रखकर योजना को नया स्वरूप दिया गया.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत करीब 81 करोड़ लोगों को सस्ते दाम पर अनाज देने की गारंटी दी गई थी. कोविड-19 महामारी के दौरान मोदी सरकार ने मुफ्त अनाज योजना को ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के नाम से लागू किया और इसे एक अलग पहचान दी.नाम बदलने की नीति का व्यापक असरयोजनाओं के अलावा मोदी सरकार और बीजेपी शासित राज्यों ने सड़कों, इमारतों और संस्थानों के नाम भी बदले हैं. राजपथ को कर्तव्य पथ किया गया, प्रधानमंत्री आवास की रेस कोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग रखा गया और राजभवनों को लोकभवन कहा जाने लगा. इसके साथ ही IPC और CrPC जैसे औपनिवेशिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जैसे भारतीय नाम अपनाए गए.

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