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SIR को लेकर केरल में छिड़ा सियासी घमासान,लाखों लोगों के काटे जाएंगे नाम!

SIR को लेकर केरल में छिड़ा सियासी घमासान,लाखों लोगों के काटे जाएंगे नाम!
  • PublishedNovember 7, 2025

बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरी होने के बाच चुनाव आयोग अब इसे सिलसिलेवार तरीके से पूरे देश में करवा रहा है. इसी कड़ी में केरल में एसआईआर की गणना मंगलवार से शुरू हो चुकी है. हालांकि दक्षिण के इस छोटे से राज्य से कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं लगती, ऐसे में वहां पर घुसपैठिए या अवैध वोटर की संभावना कम ही रहती है, लेकिन करीब 30 लाख वोटर्स को यह डर सता रहा है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जा सकते हैं.केरल में करीब 30 लाख एनआरआई होने का अनुमान लगाया जा रहा है. कई एनआरआई परिवार तो ऐसे हैं जिनका पूरा परिवार ही विदेश में ही बसा हुआ है और केरल में उनके घर बंद पड़े हुए हैं. इसलिए उनकी चिंता यही है कि उनमें से ज्यादातर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने का खतरा है.चुनाव आयोग ने पिछले दिनों देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने की घोषणा की थी, जिनमें चुनावी राज्य केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश) शामिल हैं.

दूसरी ओर, राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बुधवार (5 नवंबर) को तिरुवनंतपुरम में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें एसआईआर के मसले पर सरकार के रुख पर चर्चा की गई. मुख्यमंत्री विजयन की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक में चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन को कानूनी चुनौती देने और इसके कार्यान्वयन का विरोध करने पर सहमति बनी़. बैठक में शामिल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को छोड़कर सभी दलों ने एसआईआर प्रोसेस के खिलाफ कानूनी रूप से आगे बढ़ने के राज्य के फैसले का समर्थन किया.केरल में एनआरआई समुदाय के नाम कटने के डर को चुनाव अधिकारी भी समझ रहे हैं. विदेश में रह रहे एनआरआई समुदाय को यह आशंका है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जाएंगे, को दूर करने के लिए राज्य के चुनाव अधिकारी अभियान चला रहे हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर का कहना है कि विदेश में अपने परिवारों के साथ रहने वाले भारतीय नागरिक यह फॉर्म ऑनलाइन जमा कर सकते हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “वैरिफिकेशन के दौरान, यदि रिश्तेदार या रिश्तेदारों के रिश्तेदार जरूरी स्पष्टीकरण दे देते हैं, तो यह काफी रहेगा.”इससे पहले सितंबर में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एसआईआर के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था. इसके अलावा केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से हाल ही में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में, सीपीआई-एम और कांग्रेस ने एसआईआर को लेकर कड़ा विरोध जताया और आरोप लगाया कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में केरल में जल्दबाजी में एसआईआर प्रक्रिया लागू करने के पीछे केंद्र की बीजेपी सरकार का अपना स्वार्थ हो सकता है.इस बीच, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि केरल में एसआईआर की जरूरत और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है क्योंकि राज्य में जारी किए गए आधार कार्डों की कुल संख्या राज्य की कुल आबादी से 49 लाख अधिक पाई गई है. इसी तरह कई राज्यों में आधार कार्डों की संख्या वहां की आबादी से ज्यादा है, इसलिए एसआईआर जरूरी हो जाता है. हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि आधार कार्डों की बढ़ती संख्या की एक वजह यह भी हो सकती है कि इसमें मरे लोगों के आधार कार्ड रद्द नहीं किए गए हैं.

Written By
Aagaaz Express

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