बिहार सीएम की रेस में कई नाम,चिराग पासवान को CM बनाने के लिए कार्यकर्ताओं ने उठाई मांग
बिहार की राजनीति में इन दिनों अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन राजधानी पटना की सड़कों और दीवारों पर अलग-अलग नेताओं के समर्थन में पोस्टर दिखाई देने लगे हैं। इसी बीच लोकसभा सांसद चिराग पासवान के समर्थन में भी पोस्टर लगाए जाने लगे हैं, जिनमें उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग की जा रही है।लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के कुछ कार्यकर्ताओं ने पटना में ऐसे पोस्टर लगाए हैं जिनमें लिखा है कि “बिहार की मांग चिराग है” और राज्य को एक युवा मुख्यमंत्री की जरूरत है। इन पोस्टरों के जरिए कार्यकर्ताओं ने एनडीए नेतृत्व से चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। हालांकि इस मुद्दे पर अभी तक चिराग पासवान या उनकी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

बताया जा रहा है कि राज्य में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर जल्द फैसला होने की उम्मीद थी और माना जा रहा था कि एक-दो दिनों में स्थिति साफ हो सकती है। लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 10 से 14 मार्च तक “समृद्धि यात्रा” की घोषणा कर दी, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिल गई है। इस बीच विभिन्न नेताओं के समर्थक अपने-अपने दावों को मजबूत करने के लिए पोस्टर और बैनर के जरिए माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।इस बीच बिहार के अगले मुख्यमंत्री के संभावित चेहरों को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, भाजपा नेता दिलीप जायसवाल और अशोक जायसवाल के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम समय में कोई नया नाम भी सामने आ सकता है।उधर, होली के दिन अचानक यह खबर सामने आई कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। शुरुआत में इसे अफवाह माना गया, लेकिन बाद में खुद नीतीश कुमार ने इसकी पुष्टि कर दी। अगले ही दिन उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथों में जाएगी।