दिल्ली दंगों के सात आरोपियों में से पांच को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है, जबकि दो आरोपियों- शरजील इमाम और उमर खालिद को राहत नहीं मिली है. कोर्ट का कहना है कि हमने सभी के मामलों का अलग-अलग परीक्षण किया है. पुलिस की तरफ से जुटाए गए तथ्यों के मुताबिक उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका केंद्रीय है. इन्हें लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि दोनों ट्रायल कोर्ट में जमानत के लिए अपील कर सकते हैं.जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सोमवार (5 जनवरी, 2026) को कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) अहम है, इसका हवाला दिया गया है, लेकिन यह अधिकार कानूनी प्रावधानों के परे नहीं है.

उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरन हैदर, शिफा उर्फ रहमान, शहदाब अहमद और मोहम्मद सलीम साल 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में पांच साल से भी ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. कोर्ट ने 10 दिसंबर, 2025 को दलीलें सुनने के बाद जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट उन्हें जमानत देने से इनकार कर चुका है. 2 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बेल देने से मना कर दिया था, जिसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.