बिहार के मधुबनी में प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आपको पीएम आवास योजना का उदाहरण दूंगा। इस योजना का लक्ष्य है देश में कोई भी गरीब परिवार बेघर ना हो। सबके सिर पर पक्की छत हो आज मैं जब इनको चाबी दे रहा था उनके चेहरे पर जो संतोष नजर आ रहा था उनमें जो नया आत्मविश्वास दिख रहा था वह वाकई इन गरीबों के लिए काम करने की प्रेरणा का कारण बन जाता है।बीते दशक में 4 करोड़ से अधिक पक्के घर बनाए गए हैं, बिहार में भी अब तक 57 लाख गरीब परिवारों को पक्के घर मिल चुके हैं, पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित, पसमांदा समाज के लोगों को यह घर मिले हैं। आज ही करीब 10 लाख परिवारों को उनके पक्के घर के लिए आर्थिक मदद भेजी गई है, इसमें बिहार के 80000 ग्रामीण परिवार और लाख शहरी परिवार शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्राम पंचायत की एक और समस्या भूमि विवाद से जुड़ी रही है। कौन सी जमीन आबादी की। कौन सी जमीन खेती की है।

पंचायत की कौन सी है। सरकारी जमीन कौन सी है। इन सारे विषयों पर अक्सर विवाद रहता था। इसके समाधान के लिए जमीनों का डिजिटलकरण किया जा रहा है, इससे अनावश्यक विवादों को सुलझाने में मदद मिली है। आज पंचायती राज दिवस के मौके पर पूरा देश बिहार से जुड़ा है। यहां बिहार के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। बिजली रेल और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विभिन्न कार्यों से बिहार में रोजगार के नए मौके बनेंगे। बीते दशक में 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायत को इंटरनेट से जोड़ा गया है 5.30 लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर गांव में बने हैं। पंचायत के डिजिटल होने से एक और फायदा हुआ है जीवन-मृत्यु प्रमाण पत्र, भूमि धारण प्रमाण पत्र ऐसे कई दस्तावेज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य था, जहां पंचायतों मे 50% आरक्षण की सुविधा दी गए और इसलिए मैं नितीश का अभिनंदन करता हूं। आज बहुत बड़ी संख्या में गरीब, दलित, महादलित, पिछड़े, अति पिछड़े समाज की बहन बेटियां बिहार में जनप्रतिनिधि बनाकर सेवाएं दे रही हैं यही सच्चा सामाजिक न्याय है।