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भारत-अमेरिका डील को लेकर मार्च तक हो जाएगा सारा प्रक्रिया,जल्द होंगे हस्ताक्षर

भारत-अमेरिका डील को लेकर मार्च तक हो जाएगा सारा प्रक्रिया,जल्द होंगे हस्ताक्षर
  • PublishedFebruary 17, 2026

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. मामला अब ‘बातचीत’ से आगे बढ़कर कागजी कार्रवाई तक पहुंच गई है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि सब कुछ सही रहा तो अगले महीने यानी मार्च 2026 में इस डील पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. सोमवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पूरी प्रक्रिया पर बड़ा अपडेट दिया. उन्होंने साफ किया कि डील का खाका तो तैयार है और उसे कानूनी रूप देने के लिए भारतीय अधिकारियों की एक विशेष टीम अगले हफ्ते अमेरिका रवाना होने वाली है.इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ गया है. वाणिज्य सचिव के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों का एक दल 23 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में अमेरिका का दौरा करेगा. इस दौरे का मुख्य मकसद डील के ‘लीगल टेक्स्ट’ यानी कानूनी मसौदे को फाइनल करना है.इस महत्वपूर्ण मिशन की अगुवाई वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Joint Secretary) दर्पण जैन करेंगे. यह टीम वाशिंगटन में अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बैठकर समझौते की बारीकियों को परखेगी.

हालांकि, ऐसा नहीं है कि बातचीत केवल इसी दौरे पर निर्भर है, दोनों देशों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लगातार वर्चुअल बातचीत पहले से ही चल रही है. अब यह फिजिकल मीटिंग उसी बातचीत को निष्कर्ष तक ले जाने का काम करेगी.दरअसल, इसी महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक साझा बयान जारी किया था. इसमें बताया गया था कि अंतरिम व्यापार समझौते का एक ‘फ्रेमवर्क’ या ढांचा तैयार कर लिया गया है.वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे बहुत ही सरल शब्दों में समझाया. उन्होंने कहा, “संयुक्त बयान ने डील की रूपरेखा तय कर दी है. अब चुनौती यह है कि उस रूपरेखा को एक कानूनी समझौते में बदला जाए, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर कर सकें.” आसान भाषा में कहें तो, मकान का नक्शा पास हो गया है, अब ईंट-गारे का काम यानी पक्के कागजात तैयार किए जा रहे हैं ताकि आगे जाकर कोई कानूनी अड़चन न आए.यह डील पक्की कब होगी? इस पर सरकार का रुख सकारात्मक है, लेकिन सतर्कता भरा भी है. वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों पक्षों की कोशिश है कि मार्च में इस समझौते को ‘क्लोज’ कर लिया जाए और हस्ताक्षर कर दिए जाएं.हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने इसके लिए कोई अंतिम समय सीमा (Deadline) तय नहीं की है. उनका कहना था, “कानूनी समझौते को अंतिम रूप देने में कई तरह की पेचीदगियां (Intricacies) होती हैं, जिन्हें दोनों पक्षों को सुलझाना होगा.” इसका मतलब यह है कि अगर वाशिंगटन में होने वाली बातचीत में सभी कानूनी पेंच सुलझ गए, तो मार्च में खुशखबरी मिल सकती है. लेकिन अगर जरूरत पड़ी, तो बातचीत का दौर आगे जुलाई तक भी खिंच सकता है, हालांकि प्राथमिकता मार्च ही है.

Written By
Aagaaz Express

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