AEDO भर्ती परीक्षा धांधली मामले में अब ऐसे खुलेगा सब राज,BPSC को मिला EOU का सहारा

बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामले में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में कार्यरत एक टेक्निकल असिस्टेंट को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के ककरिया गांव निवासी रौशन कुमार के रूप में हुई है. आर्थिक अपराध इकाई का आरोप है कि रौशन कुमार ने परीक्षा केंद्र में फर्जी पहचान के साथ प्रवेश कर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी.जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में आयोजित AEDO भर्ती परीक्षा के दौरान धांधली की शिकायतें सामने आने के बाद मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गई थी. जांच के दौरान कई तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर रौशन कुमार की संलिप्तता सामने आई. एएसपी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया. टीम 3 अगस्त को मुंबई पहुंची और ट्रॉम्बे स्थित BARC परिसर से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाया जा रहा है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी. EOU की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि 17 अप्रैल 2026 को नालंदा जिले के सोहसराय स्थित पीएल साहू हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर रौशन कुमार मौजूद था.

जांच एजेंसी के अनुसार, अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसने परीक्षा केंद्र पर मोबाइल जैमर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारियों जैसी टी-शर्ट पहन रखी थी. इसी वेशभूषा का फायदा उठाकर वह परीक्षा केंद्र के भीतर घूमता रहा, जिससे किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ. जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी.सूत्रों के मुताबिक, रौशन कुमार की नियुक्ति वर्ष 2025 में देश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई में टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर हुई थी. वह वर्तमान में वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा था. जांच एजेंसियों का कहना है कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्था में कार्यरत होने के बावजूद उसका नाम भर्ती परीक्षा में कथित सेटिंग और धांधली के मामले में सामने आना गंभीर चिंता का विषय है.आर्थिक अपराध इकाई की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी ने फर्जी पहचान का सहारा लेकर परीक्षा केंद्र के सुरक्षा प्रबंधों में सेंध लगाने की कोशिश की थी. अब EOU उससे यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे मामले में उसकी भूमिका क्या थी और उसके संपर्क किन लोगों से थे. जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या वह किसी सॉल्वर गैंग, दलाल या परीक्षा माफिया के लिए काम कर रहा था.EOU के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जाएगी. जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी.

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