सरकार ने कल बुलाई सर्वदलीय बैठक,अमेरिका-इजराइल और ईरान को लेकर पीएम मोदी लेंगे बड़ा फैसला
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करने के लिए बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. बैठक बुधवार शाम पांच बजे बुलाई गई है. कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दल पश्चिम एशिया युद्ध और इसके भारत पर प्रभाव को लेकर सरकार से लगातार सवाल कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा था कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है. प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा था कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा.

उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है तथा भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। ‘‘इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है.’’पश्चिम एशिया संकट से आप सब रूबरू हैं. इस युद्ध ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. भारत के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है. व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं. इसलिए सप्लाई प्रभावित हुई है. लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, और उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है. तीन लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित लौट चुके हैं. कुछ भारतीयों की जानें भी गई हैं. भारत अमेरिका, इजराइल और ईरान तीनों ही देशों के संपर्क में है।