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फॉर्म-7 को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष का बड़ा आरोप?अल्पसंख्यकों-दलितों का वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है इस्तेमाल

फॉर्म-7 को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष का बड़ा आरोप?अल्पसंख्यकों-दलितों का वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है इस्तेमाल
  • PublishedFebruary 6, 2026

विपक्ष ने विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं. विपक्ष का आरोप है कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही इस प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताते हुए निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप और स्वतंत्र जांच की मांग की है. वहीं फॉर्म-7 को लेकर कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर जीवित और योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं. उनका कहना है कि इससे खासतौर पर हाशिए पर रहने वाले समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस ने मांग की है कि फॉर्म-7 से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाए और संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया पर लोग रोक लगाई जाए. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि चुनाव आयोग का फॉर्म-7 क्या है, इसे कौन भर सकता है और इसका यूज कब होता है.फाॅर्म-7 भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक ऑफिशियल फॉर्म है.

जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जाता है. यह फॉर्म जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के तहत आता है. इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है, ताकि मृत, डुप्लीकेट या अयोग्य मतदाताओं के नाम सूची में न रहे.फॉर्म-7 केवल वैध कारणों से ही भरा जा सकता है. जैसे किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो, मतदाता स्थायी रूप से दूसरे क्षेत्र में शिफ्ट हो गया हो, किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में एक से ज्यादा जगह दर्ज हो, कोई नाम गलत तरीके से सूची में शामिल हो गया हो, व्यक्ति मतदान के लिए पात्र न हो इसके अलावा कोई मतदाता स्वयं भी स्थान परिवर्तन या अन्य कारणों से अपना नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भर सकता है.फॉर्म-7 कोई भी भर सकता है. आम मतदाता से लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी इस फॉर्म के जरिए आपत्ति दर्ज कर सकते हैं. हालांकि नियमों के अनुसार दावों और आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी फॉर्म भरने वाले व्यक्ति की होती है. गलत जानकारी देने पर कानून के तहत दंड का प्रावधान भी है.विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि फॉर्म-7 के प्री-प्रिंटेड आवेदन बड़ी संख्या में तैयार कर संगठित तरीके से बीएलओ को सौंपे जा रहे हैं. पार्टी का कहना है कि इसका इस्तेमाल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और वरिष्ठ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए किया जा रहा है. कई मामलों में जिन लोगों के नाम से फॉर्म भरे गए, उन्होंने खुद इससे इनकार किया है. इसे लेकर कांग्रेस ने मांग की है कि बिना वैध पहचान और प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए. साथ ही व्यक्तिगत सत्यापन के बिना किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए.कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

Written By
Aagaaz Express

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