मेडिकल और उससे जुड़े विषयों की पढ़ाई अगर आप घर बैठे या ऑनलाइन करना चाहते हैं तो अब ये संभव नहीं हो सकेगा. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने ऑनलाइन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड से चलाए जा रहे मेडिकल और उससे जुड़े हेल्थकेयर कोर्सों पर रोक लगा दी है. यह फैसला जुलाई-अगस्त 2025 से शुरू होने वाले एजुकेशन सेशन से लागू होगा. यूजीसी ने सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इस फैसले का सख्ती से पालन करें.आइए जानते हैं कि यूजीसी ने ये फैसला क्यों लिया है. इस फैसले के बाद अब ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग मोड में संचालित कौन से कोर्स बंद हो जाएंगे?यूजीसी ने यह फैसला 23 जुलाई 2025 को हुई 592वीं बैठक में लिया है. यह निर्णय नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (एनसीएएचपी) एक्ट, 2021 के तहत की गई सिफारिशों के बाद आया है. ये सिफारिशें 22 अप्रैल 2025 को हुई डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो वर्किंग ग्रुप की 24वीं बैठक के बाद जारी की गई हैं.यूजीसी के इस नए नियम के मुताबिक, मनोविज्ञान माइक्रोबायोलॉजी खाद्य और पोषण विज्ञान बायोटेक्नोलॉजी क्लिनिकल न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स जैसे कई कोर्स पर रोक लगाई गई है.

अगर कोई डिग्री प्रोग्राम ऐसा है, जिसमें एक से ज्यादा विषय हैं और उनमें से कोई एक विषय स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, तो सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़े विषय की पढ़ाई ऑनलाइन नहीं हो पाएगी. जैसे, अगर बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की डिग्री में साइकोलॉजी और हिस्ट्री जैसे सब्जेक्ट हैं तो साइकोलॉजी की ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक लगेगी, लेकिन इतिहास की पढ़ाई जारी रहेगी.यूजीसी के नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी संस्था के साथ साझीदारी के लिए पहले यूजीसी से मंजूरी लेना जरूरी है. यह मंजूरी 2022 और 2023 के नियमों के तहत मिलती है, जो विदेशी संस्थाओं के साथ साझा डिग्री या दोहरी डिग्री (जॉइंट या डुअल डिग्री) और भारत में उनके कैंपस खोलने से जुड़े हैं. यूजीसी के अनुसार, पहले भी 12 दिसंबर 2023 को ऐसी चेतावनी दी गई थी. इसके बावजूद, कई कॉलेज और एडटेक प्लेटफॉर्म बिना मंजूरी के विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर ऑनलाइन डिग्री या डिप्लोमा प्रोग्राम चला रहे हैं।