बिहार की राजनीति में जगदानंद सिंह का अपना सियासी मुकाम है और लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में उन्हें गिना जाता है. आरजेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और लालू के साथ-साथ तेजस्वी यादव के साथ भी जगदानंद सिंह के रिश्ते बहुत ही अच्छे हैं. छह बार विधायक और एक बार लोकसभा सांसद रहे. 2019 में जगदानंद सिंह को आरजेडी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त गया था. 2020 के चुनाव में आरजेडी के प्रदर्शन में जगदानंद सिंह का अहम रोल माना जाता है. अब चुनाव से ठीक पहले आरजेडी की जगह अति पिछड़े वर्ग से आने वाले मंगनी लाल मंडल को कमान सौंप दी है, जिसके बाद पार्टी में जगदानंद सिंह के नई भूमिका को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।

आरजेडी की राज्य परिषद की बैठक में तेजस्वी यादव ने जगदानंद सिंह को पार्टी में राष्ट्रीय भूमिका दिए जाने की मांग उठाई. ऐसे में अब बिहार की सियासत में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आरजेडी में जगदानंद सिंह को क्या रोल मिलेगा. वहीं, राज्य परिषद की बैठक के दौरान तेजस्वी यादव की मांग पर लालू यादव भी सहमति दिखाते नजर आए. लालू यादव ने कहा कि जगदानंद सिंह को हम बहुत धन्यवाद देते हैं. उन्होंने काफी काम किया और पार्टी को आगे बढ़ाया है. मुझे भी 28 सालों से आरजेडी का राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बिठाने के लिए आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद।मंगनी लाल यादव के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब अगली पांच जुलाई को आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है. लालू यादव ने जिस तरह से आरजेडी के 28 साल तक अध्यक्ष बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया है, उससे सवाल उठने लगा है कि क्या लालू यादव अब पार्टी के अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ देंगे? अगर लालू ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से अपने कदम पीछे खींचते हैं तो फिर क्या जगदानंद सिंह को कमान सौंपी जाएगी या फिर किसी दूसरे चेहरे की ताजपोशी होगी? तेजस्वी ने जिस तरह जगदानंद सिंह को राष्ट्रीय भूमिका देने की वकालत की है, उससे यह बात तय मानी जा रही है कि जल्द ही जगदानंद सिंह को आरजेडी में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है, लेकिन उनका रोल क्या होगा, ये साफ नहीं है।दरअसल, लालू प्रसाद यादव ने जिस तहर पहले मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है और उसके बाद अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जगदानंद सिंह का नाम आगे किया जाता है तो इससे बिहार के लोगों को बड़ा संदेश जाएगा. लालू यादव और तेजस्वी यादव की इस रणनीति के तहत लालू परिवार पर लगने वाले परिवारवाद के दाग को धोने के साथ-साथ सवर्णों खासकर राजपूत समाज को भी बड़ा मैसेज देने की कोशिश की जाएगी।लालू प्रसाद यादव अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनते हुए देखना चाहते हैं. तेजस्वी यादव 2015 और 2023 में दो बार डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाल चुके हैं, लेकिन सीएम की कुर्सी पर विराजमान नहीं हो सके. इस बार आरजेडी बिहार की सियासी जंग फतह करने के लिए हर संभव दांव चल रही है. जाति समीकरण को दुरुस्त करने के साथ-साथ गठबंधन में सहयोगी दलों का दायरा भी बढ़ाया है. लालू यादव ने गुरुवार को कहा कि ‘अति पिछड़े’ वर्ग को एकजुट कर मजबूत बनाना है।उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर उन्हें बैठाने के लिए भी सभी का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि वे पिछले 28 साल से इस पद पर हैं. लालू यादव ने कहा कि BJP और नीतीश कुमार को हटाकर अपनी सरकार बनानी है, गरीब और किसान की सरकार बनानी है और उनकी उम्मीदों को पूरा करना है. उन्होंने सभी से अपील की कि वे पूरी मजबूती के साथ तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाए।