दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं. आज इस हड़ताल का 18वां दिन है. इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. इसमें मांग की गई है कि एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को तुरंत मेडिकल मदद दी जाए. वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों के लिए ये विरोध कर रहे हैं. ये PIL एक्टिविस्ट और वकील राकेश कुमार सैनी ने दायर की है.हलफनामे में कहा गया है कि उड़ान के दौरान की फुटेज, क्रू मेंबर्स के बयान, ऑपरेशन से जुड़ी बातचीत और पीड़ितों की निजी जानकारी को गोपनीय रखना जरूरी है. ब्यूरो ने बताया कि कि ये कानूनी पाबंदियां निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए हैं. AAIB ने मृतक पायलट के पिता पुष्कर राज सभरवाल की तरफ से दायर याचिका का जवाब देते हुए ये हलफनामा दाखिल किया है.

एनेक्स 13 में एयरक्राफ्ट दुर्घटना की जांच करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बताई गई है. वहीं आर्टिकल 26 उस देश को, जहां दुर्घटना होती है, दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू करने के लिए बाध्य करता है. वहीं, एनेक्स 13 और एयरक्राफ्ट (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2025 के तहत ‘स्टेट ऑफ रजिस्ट्री’, ‘स्टेट ऑफ ऑपरेटर’, ‘स्टेट ऑफ डिजाइन’ और ‘स्टेट ऑफ मैन्युफैक्चर’ की भागीदारी का स्पष्ट प्रावधान है. जांच प्रक्रिया में इन सभी के पास मान्यता प्राप्त प्रतिनिधियों और तकनीकी भागीदारी के माध्यम से तय अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं.AAIB ने हलफनामे में कहा, “इस तरह, यह जांच सिर्फ म्युनिसिपल स्तर की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार की गई और संधि के तहत होने वाली जांच का रूप ले लेती है. इसे उस देश द्वारा किया जाता है जहां घटना हुई हो और इसमें वे सभी संबंधित देश शामिल होते हैं जिनका विमान, ऑपरेटर, डिजाइन या निर्माण से कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संबंध हो.”