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नवरात्र के छठे दिन आज होगी मां कात्यायनी की पूजा,पूरा होगी हर मनोकामना

नवरात्र के छठे दिन आज होगी मां कात्यायनी की पूजा,पूरा होगी हर मनोकामना
  • PublishedMarch 24, 2026

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस साल 19 मार्च से शुरू हुआ और आज इसका छठा दिन है. हर वर्ष की तरह इस दिन भक्तजन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना में रमे हुए हैं. घर-घर मंदिरों में भव्य फूलों और दीपों की सजावट देखने को मिल रही है. छोटे-छोटे बच्चे भी अपनी माँ के साथ पूजा में शामिल होकर माता का आशीर्वाद पाने की चाह में उत्साहित हैं. मां कात्यायनी को दुर्गा माता के छठे स्वरूप के रूप में पूजा जाता है. कहा जाता है कि उनकी कृपा से भय, शोक और रोग से मुक्ति मिलती है. इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और भक्त मां को घी का दीपक, रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करते हैं।

कात्यायनी माता की आरती:

जय जय अम्बे जय कात्यायनी.
जय जगमाता जग की महारानी.
बैजनाथ स्थान तुम्हारा.
वहां वरदाती नाम पुकारा.
कई नाम हैं कई धाम हैं.
यह स्थान भी तो सुखधाम है.
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी.
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी.
हर जगह उत्सव होते रहते.
हर मन्दिर में भगत हैं कहते.
कात्यायनी रक्षक काया की.
ग्रंथि काटे मोह माया की.
झूठे मोह से छुडाने वाली.
अपना नाम जपाने वाली.
बृहस्पतिवार को पूजा करिए.
ध्यान कात्यायनी का धरिये.
हर संकट को दूर करेगी.
भंडारे भरपूर करेगी.
जो भी मां को भक्त पुकारे.
कात्यायनी सब कष्ट निवारे.

मां कात्यायनी का पूजा मंत्र:

कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।। जय जय अम्बे, जय कात्यायनी। जय जगमाता, जग की महारानी।
कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां। स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते।’

मां कात्यायनी की कथा:

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की कथा के अनुसार, एक समय की बात है, कत नाम के एक महर्षि थे, जिनके पुत्र का नाम कात्य था और उन्हीं के गोत्र में महर्षि कात्यायन हुए. महर्षि कात्यायन की कोई संतान नहीं थी, इसी वजह से उन्होंने पुत्री सुख प्राप्त करने के लिए देवी भगवती का कठोर तप किया. उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें वरदान दिया कि वह उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी.कुछ समय बाद महिषासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य ने धरती पर अत्याचार करना शुरू कर दिया, जिससे सभी देवता परेशान हो उठे. सभी देवताओं के कहने पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज से एक देवी को उत्पन्न किया. फिर देवताओं ने उस देवी का नाम कात्यायनी रखा, क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले महर्षि कात्यायन के यहां जन्म लिया था और उनकी पूजा की थी.इसके बाद मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया और सभी देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया. इसी कारण नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी माता की पूजा की जाती है और उन्हें महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी जाना जाता है।

Written By
Aagaaz Express

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