अभिषेक बनर्जी की बढ़ने लगी मुश्किलें,फिर से आज घर पहुंची पुलिस

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. आज शनिवार को पुलिस कालीघाट स्थित उनके आवास पहुंची. पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी पुलिस स्टेशन की एक टीम अभिषेक के घर गई. इसमें महिला अधिकारी भी शामिल हैं.पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने में दर्ज कथित जमीन कब्जा और उगाही से जुड़े मामले की जांच के लिए पुलिस अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची. इस मामले में अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित राय को संदिग्ध माना जा रहा है और पुलिस उन्हें तलाशने के लिए अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची थी.सूत्रों के अनुसार सुमित राय के मोबाइल फोन की लोकेशन संबंधित इलाके में पाई गई है. हालांकि अभिषेक बनर्जी ने पुलिस को बताया कि सुमित राय घर पर मौजूद नहीं हैं.पता चला है कि आपदा प्रबंधन टीम के सदस्यों ने ताला तोड़कर अभिषेक के घर में प्रवेश किया. माना जा रहा है कि अभिषेक घर के अंदर ही थे. ममता बनर्जी भी घर पर मौजूद थीं. ममता बनर्जी की इस्तेमाल की जाने वाली एक वीवीआईपी कार घर के बाहर देखी गई. पुलिस के जाने के बाद ममता बनर्जी भी चली गईं.कल, शुक्रवार को, सीआईडी ​​​​तृणूल सांसद अभिषेक बनर्जी के कालीघाट के पटुआपारा स्थित घर पर पहुंची. सीआईडी ​​​​अभिषेक के घर ‘4 तारीख को डीजे बजेगा’ वाली टिप्पणी के संबंध में नोटिस देने आई थी. उस समय अभिषेक घर पर नहीं थे. काफी देर इंतजार करने के बाद जब सीआईडी ​​​​जाई, तब अभिषेक आए. बाद में, सीआईडी ​​​​अधिकारी फिर से आए.

हालांकि, अभिषेक ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया. पता चला है कि अभिषेक बनर्जी को 16 तारीख को सुबह 11 बजे भवानी भवन में पेश होने का आदेश दिया गया है.CID अभिषेक बनर्जी से फर्जी हस्ताक्षर मामले में 6 घंटे पूछताछ कर चुकी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से कोलकाता में सीआईडी ने गुरुवार को पूछताछ की. उनसे ये पूछताछ पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के नेता विपक्ष के चयन से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर मामले में की गई. अभिषेक CID मुख्यालय शाम 5.50 बजे पहुंचे थे और बाहर निकले रात को करीब साढ़े 11 बजे.यह विवाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई एक बैठक से जुड़ा है, जिसमें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा हुई थी. आरोप है कि इस मामले में तैयार किए गए दस्तावेजों पर कई विधायकों की गैरमौजूदगी के बावजूद उनके हस्ताक्षर कर दिए गए. इन आरोपों के आने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया.ED कोलकाता, म्युनिसिपैलिटी भर्ती घोटाले में TMC विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़ी 7 जगहों पर रेड की. अब तक की जांच से पता चला है कि मदन मित्रा ने कामरहाटी म्युनिसिपैलिटी समेत कई म्युनिसिपैलिटी में अलग-अलग पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के ज़रिए कैश और सोने के रूप में रिश्वत ली थी. मदन मित्रा का संबंध ऐसी 125 से ज़्यादा गैर-कानूनी नियुक्तियों से है.

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