अमेरिका-ईरान की बातचीत रही बेनतीजा,इस्लामाबाद वार्ता हुआ फ्लॉप!

जिस तरीके से अमेरिका-ईरान की जंग में सीजफायर हुआ और पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह बातचीत हुई, उससे इसके फेल होने की आशंका पहले से ही थी। और यही हुआ भी। अमेरिका-ईरान की बातचीत बेनतीजा रही।मिडिल ईस्ट के जंग को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ तौर पर कहा कि 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।दोनों देशों के बीच तीन दौर की वार्ता हुई लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने या उससे जुड़े किसी भी कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने की स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धता दे। लेकिन ईरान इस मुद्दे पर तैयार नहीं हुआ।जेडी वेंस ने कहा-‘हमें इस बात की पक्की गारंटी चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा, और न ही ऐसे साधन जुटाएगा जिनकी मदद से वह तेज़ी से ऐसा कर सके। हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे ही अमेरिका लौट रहे हैं।’जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए ज़्यादा बुरी खबर है, न कि अमेरिका के लिए। इसलिए, हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे ही अमेरिका वापस जा रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तें मानने से मना कर दिया है। हम पिछले 21 घंटों से इस काम में लगे हुए हैं और हमने ईरानियों के साथ कई अहम चर्चाएं की हैं। यह तो अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं।वहीं ईरान का रुख बिल्कुल अलग रहा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई कहा कि कि बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष कितनी ईमानदारी और संतुलन दिखाता है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट, परमाणु कार्यक्रम,प्रतिबंध हटाने, युद्ध मुआवजा और पूरे क्षेत्र में जंग खत्म करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने अमेरिका पर अत्यधिक और गैरकानूनी मांगें रखने का आरोप लगाया। उधर, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बातचीत बेनतीजा रहने के पीछे अमेरिका की मांगों को जिम्मेदार ठहराया। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत बेनतीजा होने से अब पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा का स्रोत माने जाने वाले मिडिल ईस्ट के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान की ओर से Strait of Hormuz को फिर से खोलने की कोई पक्की बात न होने से, दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति पर रोक जारी रहेगी। उधर, इस्लमानाबाद में अपनी मौजूदगी के दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेस ने यह नहीं बताया कि अब आगे क्या होगा? उन्होंने संकेत दिया कि ईरान अभी भी लौटकर अमेरिका के अंतिम और सबसे अच्छे प्रस्ताव को स्वीकार कर सकता है, लेकिन उन्होंने मतभेदों को दूर करने के लिए भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अगर दोनों देश अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे तो एक बार फिर मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने के आसार है। साथ ही पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट से आगे भी जूझना पड़ सकता है।

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