उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद वरुण गांधी ने परिवार सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मीटिंग के दौरान उनकी पत्नी और बेटी भी मौजूद रहीं. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पांच राज्यों में चुनावी माहौल गर्म है और राजनीतिक हलकों में इसके व्यापक संकेत तलाशे जा रहे हैं.वरुण गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्हें परिवार सहित प्रधानमंत्री का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला. अपने पोस्ट में उन्होंने पीएम मोदी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व में ‘पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव’ महसूस होता है और यह मुलाकात इस विश्वास को मजबूत करती है कि ‘वे देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं.’तस्वीर और मुलाकात सामने आने के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि अगले वर्ष यूपी विधानसभा चुनाव से पहले वरुण गांधी किसी भूमिका में दिखाई दे सकते हैं. कई विश्लेषक इसे भाजपा और गांधी परिवार (मेनका–वरुण) के बीच जमी बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देख रहे हैं.लोकसभा चुनाव 2024 से पहले वरुण गांधी कई मौकों पर बीजेपी और केंद्र सरकार की कठोर आलोचना कर चुके हैं. किसान आंदोलन से लेकर बेरोजगारी तक के मुद्दों पर वे खुले रूप से अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते रहे.

2024 में पार्टी ने उन्हें पीलीभीत से टिकट नहीं दिया, जबकि उनकी मां मेनका गांधी को सुल्तानपुर से टिकट मिला. सुल्तानपुर में चुनाव प्रचार के दौरान भी वरुण ने मंच पर बीजेपी का पटका या झंडा इस्तेमाल नहीं किया, जिसे उनकी नाराजगी का सार्वजनिक संकेत माना गया.इस मुलाकात को लेकर एक और बड़ा राजनीतिक कोण सामने आया है. पश्चिम बंगाल चुनाव. दरअसल वरुण गांधी की पत्नी बंगाल मूल की हैं और भाजपा इस बार बंगाल में बड़े स्तर पर वापसी की कोशिश कर रही है. वरुण गांधी उनके पार्टी महासचिव रहते हुए बंगाल के प्रभारी भी रह चुके हैं और उस दौरान उन्होंने राज्य इकाई को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी. राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि पार्टी वहां उन्हें फिर सक्रिय भूमिका दे सकती है, ठीक वैसे ही जैसे राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने बंगाल इकाई को पुनर्संरचना दी.पीलीभीत टिकट कटने, संगठनात्मक पदों से हटाए जाने और लगातार नाराजगी के संकेतों के बाद वरुण गांधी और BJP के रिश्ते में एक दूरी बन गई थी. लेकिन पीएम मोदी से मुलाकात को इसी दूरी को पाटने की दिशा में पहला संकेत माना जा रहा है. वरुण गांधी की भाजपा में संभावित ‘वापसी’ या चुनावी भूमिका पर अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मुलाकात ने राजनीतिक हलचलों को तेज कर दिया है.