हिंदू शास्त्रों में नागलोक का वर्णन बहुत ही विस्तृत और अनोखे ढंग से मिलता है. इस सावन में 17 अगस्त सोमवार को नाग पंचमी का पावन पर्व नियम से मनाया जाएगा. इस अवसर पर नाग देव और उनकी रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानना बहुत खास माना जाता है. वैदिक साहित्य के अनुसार, पूरे ब्रह्मांड को कुल 14 लोकों में बांटा गया है. इनमें 7 ऊपर के लोक और 7 नीचे के लोक शामिल हैं. नीचे के लोकों में स्थित पाताल लोक को ही नागलोक या भोगवती पुरी के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों में इस लोक को केवल एक सोच न मानकर एक बहुत ही समृद्ध और शक्तिशाली लोक के रूप में स्वीकार किया गया है. यह स्थान प्राचीन काल में एक विशेष सभ्यता का बहुत बड़ा केंद्र माना जाता था.श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध में इस रहस्यमयी लोक का बहुत सुंदर विवरण दिया गया है. ग्रंथ में बताया गया है कि वितल, सुतल, तलातल, महातल और रसातल के ठीक नीचे पाताल लोक स्थित है. इस पाताल लोक की मुख्य राजधानी का नाम भोगवती है. इस स्थान पर वासुकि, तक्षक, कालिया और ऐरावत जैसे बहुत ही शक्तिशाली नाग राजा अपना राज्य चलाते हैं. पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में दिए गए विवरण के अनुसार, इस लोक का अपना एक अलग ही महत्व है. यहां के राजा अपने लोक की सुरक्षा और नियम का पूरा ध्यान रखते हैं. इस पाताल लोक से जुड़ी कथाएं लोगों को बहुत आकर्षित करती हैं.

यह स्थान शास्त्रों में एक बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में दर्ज है.शास्त्रों में पाताल लोक के वातावरण के बारे में बहुत ही अनोखी बातें बताई गई हैं. इस लोक में सूर्यदेव का प्रकाश सीधा नहीं पहुंचता है. सूर्यदेव की किरणें न पहुंचने के बाद भी यह स्थान पूरी तरह से अंधेरे में नहीं रहता है. इस लोक में रहने वाले नागों के सिर पर मौजूद मणियों की दिव्य चमक से पूरा पाताल लोक हमेशा जगमगाता रहता है. मणियों की इसी रोशनी के कारण वहां का पूरा वातावरण हमेशा प्रकाशित रहता है. वहां किसी भी प्रकार के अंधेरे का प्रभाव नहीं पड़ता है. मणियों की यह सुंदर चमक पाताल लोक को एक बहुत ही भव्य और सुंदर रूप देती है. शास्त्रों का यह विवरण इस लोक को बहुत अधिक रहस्यमयी और अलौकिक बनाकर सबके सामने प्रस्तुत करता है.महाभारत ग्रंथ में भी नागवंश की उत्पत्ति से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. इसमें कश्यप ऋषि और कद्रू की पौराणिक कहानी का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसके साथ ही महाभारत में नागलोक की बहुत ही समृद्ध संस्कृति को दिखाया गया है. ग्रंथ के अनुसार, अर्जुन का विवाह नागकन्या उलूपी के साथ संपन्न हुआ था. इसके अलावा जब भीम संकट में थे, तब उन्हें नागलोक में 10 हजार हाथियों का बल देने वाले विशेष रस का पान कराया गया था. यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि उस काल में यह लोक शक्ति का बहुत बड़ा केंद्र था. इन सब कथाओं से पता चलता है कि प्राचीन समय में नागलोक का अपना एक बहुत ही अलग और बड़ा प्रभाव था.वैदिक ग्रंथों और प्राचीन ग्रंथों में दी गई ये सभी घटनाएं नागलोक की सच्चाई को दर्शाती हैं. इन विवरणों से यह साफ़ होता है कि यह स्थान केवल एक काल्पनिक कहानी नहीं है. प्राचीन काल में यह लोक भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान रखता था. नाग पंचमी के इस पावन पर्व पर इन बातों को जानना और समझना बहुत ही फलदायी माना जाता है. इस दिन नियमपूर्वक ध्यान करने और शास्त्रों की बातों को समझने से मन में सच्चा ज्ञान आता है. नाग देव से जुड़ी ये पुरानी कथाएं हमें हमारी प्राचीन परंपराओं और ग्रंथों की गहराई से जोड़ती हैं. सही भाव से इन बातों का अध्ययन करने पर जीवन में धर्म और नियमों का महत्व अच्छी तरह समझ आता है.