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सब्जी,दाल-चावल के दामों में होगी बड़ी बढ़ोतरी,देश में नहीं थम रही महंगाई

सब्जी,दाल-चावल के दामों में होगी बड़ी बढ़ोतरी,देश में नहीं थम रही महंगाई
  • PublishedJune 3, 2026

भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है। अब तक देश के लिए सिरदर्द बना कच्चा तेल तो एक तरफ था ही, लेकिन अब फर्टिलाइजर संकट सरकार और आम जनता के लिए नया और सबसे बड़ा टेंशन बन गया है।भारत में महंगाई की चर्चा होते ही सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतों का जिक्र होता है। लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था के सामने एक नया खतरा खड़ा हो गया है। यह खतरा है फर्टिलाइजर की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में आ रही रुकावटों का। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में सब्जियां, दालें और अनाज महंगे हो सकते हैं, जिससे आम लोगों का घरेलू बजट बिगड़ सकता है।भारत अपनी फर्टिलाइजर जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इनमें से काफी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते देश तक पहुंचती है। लेकिन, हालिया युद्ध और तनाव की वजह से यह पूरा रूट बुरी तरह बाधित हो चुका है, जिससे खाद की खेप समय पर भारत नहीं पहुंच पा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत को फर्टिलाइजर आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।फर्टिलाइजर संकट ऐसे समय में सामने आया है जब मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मौसम विभाग ने इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है। इसके साथ ही एल नीनो (El Nino) की संभावना भी काफी ज्यादा बताई जा रही है। एल नीनो ऐसी स्थिति होती है जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है और भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। कम बारिश का सीधा असर खेती और फसल उत्पादन पर पड़ता है।जानकारी के मुताबिक भारत ने हाल ही में लगभग 25 लाख टन यूरिया सामान्य कीमत से कहीं अधिक दरों पर आयात किया है। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की आशंका है। सरकार हर साल किसानों को सस्ती दरों पर फर्टिलाइजर उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी देती है।

इस वर्ष इसके लिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण यह खर्च 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।फर्टिलाइजर आयात महंगा होने का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। इसके कारण देश का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे व्यापार घाटे पर दबाव आएगा। ज्यादा आयात का मतलब ज्यादा डॉलर की जरूरत और इसका असर रुपये की मजबूती पर पड़ सकता है। यदि रुपया कमजोर होता है तो आयात और महंगे हो जाएंगे, जिससे एक दुष्चक्र शुरू हो सकता है। इसका असर अंततः खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून उम्मीद से कमजोर रहा और फर्टिलाइजर की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो खाने की महंगाई में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में सब्जी, दाल, अनाज और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

Written By
Aagaaz Express

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