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इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का अधिकार है,सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को लगा झटका

इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का अधिकार है,सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को लगा झटका
  • PublishedMay 2, 2026

पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले मतगणना पर्यवेक्षक विवाद पर टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पर्यवेक्षक पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का अधिकार है. ये याचिका TMC की ओर से दायर की गई. इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील पेश करते हुए कहा कि चार मुद्दे हैं. उन्होंने कहा कि डीईओ को नोटिस 13 अप्रैल को जारी किया गया था, लेकिन हमें इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली. दूसरा मुद्दा यह है कि उन्हें आशंका है कि हर बूथ में गड़बड़ी होने वाली है. उन्हें यह ऑपरेशन कहां से मिलता है? यह चौंकाने वाला है.सिब्बल ने कहा कि तीसरा मुद्दा ये है कि प्रत्येक बैठक में पहले से ही एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी मौजूद है, जो सूक्ष्म पर्यवेक्षक का काम करता है. अब उन्हें एक और केंद्रीय सरकारी अधिकारी की क्या आवश्यकता है? चौथा मुद्दा यह है कि परिपत्र में ही कहा गया है कि एक राज्य सरकारी अधिकारी भी होना चाहिए, लेकिन वे राज्य सरकार द्वारा नामित किसी अधिकारी को नियुक्त नहीं करते हैं.सिब्बल ने कहा कि सीईओ के बयान में कहा गया है कि मतगणना में संभावित अनियमितताओं को लेकर विभिन्न पक्षों से आशंकाएं जाहिर की गई हैं. यह राज्य सरकार की ओर इशारा कर रहा है. सिब्बल ने कहा कि कुछ आंकड़े तो होने ही चाहिए. प्रत्येक बूथ से आशंका का क्या पता चला? उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया है और हमें यह क्यों नहीं बताया कि केंद्र सरकार की ओर से कोई उम्मीदवार नियुक्त किया जाएगा? जस्टिस बागची ने कहा कि राजनीतिक दलों से सहमति का सवाल ही कहां उठता है? सिब्बल ने कहा लेकिन वे हमें बताते हैं. यहां उन्होंने हमें नहीं बताया.जस्टिस बागची ने कहा कि वे तो यह भी कह सकते हैं कि दोनों ही केंद्रीय अधिकारी हो सकते हैं. सिब्बल ने कहा कि परिपत्र में ऐसा नहीं लिखा है. जस्टिस बागची ने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा कहा भी होता तो हम उन्हें गलत नहीं ठहरा सकते थे. क्योंकि नियमों के अनुसार, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के अधिकारी ही नियुक्त किए जा सकते हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि केवल एक ही समूह से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों का चयन होना चाहिए. जस्टिस बागची ने कहा कि मतगणनापर्यवेक्षक और मतगणना सहायक में से एक केंद्र सरकार का होना चाहिए. सिब्बल ने कहा तो उनमें से एक राज्य सरकार का होना चाहिए, है ना?

लेकिन यहां कोई राज्य सरकार नहीं है.जस्टिस बागची ने पूछा कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व की यह अवधारणा कहां से आ रही है? सिब्बल ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार के किसी नामित व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया है. हम बस इतना चाहते हैं कि वे अपने ही परिपत्र का पालन करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक और भ्रांति यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग-अलग होते हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी हैं. तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल चुनाव के लिए मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

Written By
Aagaaz Express

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