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NDA के लिए मुसीबत बना पहला चरण का चुनाव,तेजस्वी पड़ गए भारी

NDA के लिए मुसीबत बना पहला चरण का चुनाव,तेजस्वी पड़ गए भारी
  • PublishedNovember 7, 2025

बिहार में पहले चरण की वोटिंग हो चुकी है. इस बार की वोटिंग पिछले कई चुनावों से काफी अलग रही. राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक वोटिंग का रिकॉर्ड भी बना. हालांकि अभी एक ही चरण की वोटिंग पूरी हुई है, लेकिन वोटर्स ने उम्मीद से कहीं ज्यादा उत्साह दिखाया. वोटर्स के उत्साह से चुनाव आयोग भी गदगद है. उसे दूसरे चरण में भी यही फ्लो बने रहने की उम्मीद है. पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर करीब 65 फीसदी वोट ने सियासी हलचल तेज कर दी है. सभी दल इसे अपने-अपने लिए वरदान बता रहे हैं. लेकिन इतिहास बताता है कि 60 फीसदी से अधिक की वोटिंग राष्ट्रीय जनता दल के लिए मुफीद रही है।राज्य में बंपर वोटिंग ऐसे समय हुई जब पिछले महीने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराया गया जिसको लेकर विपक्षी दलों ने लगातार विरोध जताया. विपक्ष एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर धांधली और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप भी लगाता रहा है.लेकिन बिहार में वोटिंग के पिछले 4 दशकों के पैटर्न को देखें तो 60 फीसदी से अधिक की वोटिंग का मतलब है कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सत्ता में वापसी. लालू प्रसाद यादव ने जनता दल से अलग होकर साल 1997 में आरजेडी का गठन किया था. पहले लालू ने जनता दल की ओर से राज्य में सरकार चलाई फिर वह आरजेडी के दम पर सत्ता में लौटे. भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता होने के बाद सत्ता की बागडोर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सौंप दी।गुजरे 40 सालों में 1985 के चुनाव में राज्य में 324 सीटों वाली विधानसभा के लिए 56.27 फीसदी वोट डाले गए. तब कांग्रेस ने बंपर जीत हासिल की और अपने दम पर आखिरी बार राज्य में सरकार बनाई. 1985 में कांग्रेस ने 196 सीटों पर जीत हासिल की जबकि दूसरे नंबर पर रहे लोकदल के खाते में 46 सीटें आईं.

इस चुनाव में 234 सीटों पर लड़ने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 16 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रही.साल 2020 के चुनाव में नीतीश कुमार फिर से एनडीए के साथ चुनाव लड़ने मैदान में उतरे. इस बार के चुनाव में 0.38% वृद्धि के साथ 57.29 वोटिंग हुई. बहुमत एनडीए के खाते में आया. आरजेडी 75 सीट लेकर सिंगल पार्टी बनी. जबकि नीतीश की पार्टी को चुनाव में झटका लगा और 28 सीटों के नुकसान के साथ वह तीसरे नंबर की पार्टी बन गई. बीजेपी को 74 सीटें आईं. लेकिन उतार-चढ़ाव के साथ नीतीश ने यह कार्यकाल पूरा किया.इस तरह से देखा जाए तो राज्य में पिछले 40 सालों में जब-जब 60 फीसदी से अधिक वोट पड़े तब-तब आरजेडी (पहले जनता दल) सत्ता में आने में कामयाब रही. अब इस बार भी अगर यही ट्रेंड रहा तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा हो जाएगा. और नीतीश का 2 दशक पुराना दौर इतिहास बन जाएगा. हालांकि अभी एक दौर की वोटिंग और फिर मतगणना होना बाकी है।फरवरी 2000 के चुनाव में राज्य में 62.57 फीसदी वोट पड़े. इस चुनाव में लालू की जगह राबड़ी की अगुवाई में राष्ट्रीय जनता दल चुनाव मैदान में उतरी. हालांकि इस बार चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन महज 7 दिन रहने के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ गया. फिर राष्ट्रीय जनता दल की नेता राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य सरकार ने बिहार के बंटवारे और झारखंड के नए राज्य के रूप में अपनी रजामंदी जता दी।

Written By
Aagaaz Express

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