ओमप्रकाश राजभर ने चुनाव से पहले BJP की बढ़ा दी मुश्किलें,सीट को लेकर खेल दिया मास्टरस्ट्रोक
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक ऐलान कर दिया है. गाजीपुर की अपनी पारंपरिक जहूराबाद विधानसभा सीट छोड़कर वो 2027 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से लड़ेंगे. यह फैसला पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर गया है लेकिन सवाल ये है कि आखिर राजभर जहूराबाद जैसी ‘घरेलू’ सीट क्यों छोड़ रहे हैं?जहूराबाद विधानसभा सीट मुस्लिम और यादव बाहुल्य क्षेत्र मानी जाती है. यहां राजभर वोटर्स की संख्या कम है. 2022 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर को जीत तभी मिली थी जब समाजवादी पार्टी सपा गठबंधन और मुख्तार अंसारी परिवार के समर्थन से यादव व मुस्लिम वोट भी उन्हें मिल गए थे. राजभर वोटबैंक के साथ ही इन दो बड़े वोटबैंकों का सहारा उन्हें विधायक बनाता रहा लेकिन इस बार स्थिति बदल रही है.सूत्रों के मुताबिक, सपा अब जहूराबाद पर अपना पूरा जोर लगा रही है. अफजाल अंसारी परिवार की बेटी नूरिया अंसारी को यहां से टिकट दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं. अगर अंसारी परिवार खुलकर विरोध में उतर गया तो मुस्लिम और यादव वोट बैंक का बड़ा हिस्सा राजभर से खिसक सकता है.जहूराबाद में राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार वोटर्स की तादाद भी अच्छी खासी है. पिछले कुछ सालों में इन तीनों समुदायों में ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है. इन वोटर्स की संख्या हार-जीत तय करने लायक है. राजभर खुद को इन समुदायों से दूर महसूस कर रहे हैं और हार का डर साफ दिख रहा है.

अगर अंसारी परिवार के साथ-साथ अन्य ने भी विरोध का रुख अपनाया तो जहूराबाद में राजभर के लिए रास्ता और मुश्किल हो जाएगा.आजमगढ़ को सपा का गढ़ माना जाता है. यहां साइकिल का दबदबा रहा है. ओमप्रकाश राजभर अतरौलिया से लड़कर सपा के इस पारंपरिक किले में सेंध लगाना चाहते हैं. उनका मकसद पूर्वांचल में अपनी पार्टी का आधार बढ़ाना और एनडीए को मजबूत संदेश देना है. राजभर का यह कदम न सिर्फ अपनी सीट बचाने का, बल्कि बड़े सियासी खेल का हिस्सा भी माना जा रहा है.पार्टी सूत्रों का कहना है कि राजभर अब जहूराबाद से अपने बेटे या किसी अन्य नेता को मैदान में उतार सकते हैं. जबकि खुद आजमगढ़ में सपा से सीधी टक्कर लेंगे. यह फैसला 2027 के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है. अब देखना यह होगा कि जहूराबाद में सपा कितनी मजबूत वापसी करती है और अतरौलिया में राजभर का दांव कितना सफल होता है.