चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन आज होगी मां सिद्धिदात्री की पूजा,आरती के साथ करें मंत्रोच्चारण
27 मार्च 2026 यानि कि आज शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इस तिथि पर मां दुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना की जाती है। नवमी तिथि सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी। इस दिन महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र और अतिगण्ड योग का संयोग होगा। चंद्रमा 09:35 तक कर्क राशि में रहेंगे।
मां सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम् ।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
ॐ देवी महागौर्यै नमः
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

सिद्धिदात्री माता की कथा:
धार्मिक मान्यता है कि असुरों के अत्याचारों से परेशान होकर जब सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति की उत्पत्ति हुई, जिसे माता सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की और उनकी कृपा से ही उन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुईं.ऐसा माना जाता है कि माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की दाता कहा जाता है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ‘अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व’ जैसी आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. नवरात्रि के नौवें दिन (महानवमी) पर माता सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है।माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, वे कमल पुष्प पर आसीन होती हैं और उनका वाहन सिंह है. धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को लौकिक और पारलौकिक मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति संसार से निर्लिप्त रहकर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं. इनकी पूजा करने से भक्तों को ब्रह्मांड पर जीत हासिल करने का साहस मिलता है और वे सांसारिक दुखों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
सिद्धिदात्री माता की आरती:
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तू सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उस के रहे न अधूरे
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता..