बांग्लादेश में बनाए गए हिंदू मंत्री तो भारत में मोदी सरकार पर उठने लगे सवाल,जानिए क्या है पूरा मामला?
पड़ोसी देश में हाल ही में हुए पार्लियामेंट्री चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जबरदस्त जीत हासिल की है. 17 फरवरी को BNP नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस दौरान उनकी कैबिनेट का भी गठन हो गया है. तारिक कैबिनेट में जो मंत्री बनाए गए हैं, अब उनकी चर्चा हो रही है. दो अल्पसंख्यकों को भी मंत्रालय दिए गए हैं, जिनमें एक हिंदू मंत्री हैं.बांग्लादेश सरकार की नई कैबिनेट में अल्पसंख्यकों को मिली जगह को लेकर कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने एक्स पर ट्वीट किया, “जब बांग्लादेश अपनी कैबिनेट में दो अल्पसंख्यकों को स्थान दे सकता है, तो भारत में मुस्लिम मंत्रियों की संख्या शून्य क्यों? क्या यही समावेशी शासन है, प्रधानमंत्री जी?”बांग्लादेश चुनाव में रहमान की पार्टी के नेतृत्व वाले राजनीतिक गठबंधन ने 212 सीटें जीतीं, जबकि उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 77 सीटें मिलीं. बांग्लादेश आम चुनावों में अल्पसंख्यक समुदायों के चार उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जिनमें दो हिंदू भी शामिल हैं. बता दें, ये सभी BNP के उम्मीदवार थे.

गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी दो हिंदू उम्मीदवार हैं जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के टिकट पर जीते हैं. इनमें से निताई चौधरी को मंत्री बनाया गया है.इसके अलावा तीसरे चुने गए माइनॉरिटी MP सचिन प्रू हैं, जो BNP के सीनियर लीडर और बौद्ध धर्म से आते हैं. चौथे माइनॉरिटी कैंडिडेट दीपेन दीवान बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. दीपेन ने दक्षिण-पूर्वी रंगमती पहाड़ी जिले की एक सीट से जीत हासिल की है. दीपेन को भी मंत्री बनाया गया है.निताई रॉय चौधरी को कल्चरल अफेयर्स मंत्री बनाया गया है. वहीं दीपेन दीवान को चटगांव हिल ट्रैक्ट्स अफेयर्स दिया गया है. वहीं भारत की बात करें तो भारत की केंद्र सरकार में फिलहाल कोई भी मुस्लिम मंत्री नहीं है. हालांकि, मोदी सरकार में पहले मुख्तार अब्बास नकवी मंत्री रहे हैं.