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पांच दिन तक ठप हो सकता है बैंकिंग का कामकाज,28 सितंबर से हड़ताल की तैयारी

पांच दिन तक ठप हो सकता है बैंकिंग का कामकाज,28 सितंबर से हड़ताल की तैयारी
  • PublishedSeptember 22, 2026

बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल को लेकर वित्त मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है. मंत्रालय ने बैंक यूनियनों से कामकाज बंद न करने और बाकी बचे मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाने का अनुरोध किया है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 5 दिन के वर्किंग वीक समेत कई मांगों को लेकर 28 सितंबर से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. इस पर सरकार ने साफ किया है कि कर्मचारियों की ज्यादातर मुख्य मांगों पर पहले ही सकारात्मक कदम उठाए जा चुके हैं, ऐसे में हड़ताल से किसी का फायदा नहीं होगा.अगर ये हड़ताल होती है, तो देश भर में बैंकिंग सेवाओं पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है. 28 सितंबर से पहले वीकेंड की छुट्टियां हैं, जिसके चलते लगातार पांच दिन तक शाखाएं बंद रहने की नौबत आ सकती है. सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि हड़ताल का समय बैंकों की हाफ इयरली क्लोजिंग यानी 30 सितंबर से टकरा रहा है.

ये तारीख खातों के मिलान, प्रोविजनिंग, ट्रेजरी और मार्केट ऑपरेशंस के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है. इस समय पर कामकाज रुकने से आम ग्राहकों, छोटे-बड़े कारोबारियों और सरकारी लेन-देन को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी.वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ हैं. कर्मचारियों के योगदान को समझते हुए सरकार ने उनके हित में कई बड़े फैसले लिए हैं. सभी स्तर के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की गई है. नया पे-स्केल लागू किया गया है और स्टाफ वेलफेयर फंड का दायरा बढ़ाया गया है. इसके अलावा असिस्टेंट जनरल मैनेजर से लेकर चीफ जनरल मैनेजर तक के उच्च पदों की संख्या बढ़ाई गई है. सरकार ने कर्मचारियों की मांग मानते हुए विवादित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को भी बातचीत के बाद स्थगित कर दिया था.मंत्रालय ने ये भी बताया कि बैंक कर्मचारियों के वेतन रिवीजन और भत्तों से जुड़े नए द्विपक्षीय समझौते (Bipartite Settlement) पर बातचीत इतिहास में पहली बार समय से काफी पहले शुरू कर दी गई है. इसका लक्ष्य नवंबर 2027 की डेडलाइन से बहुत पहले ही प्रक्रिया को पूरा करना है. ये दिखाता है कि सरकार बैंककर्मियों की समस्याओं को लेकर कितनी गंभीर है. सरकार का कहना है कि हड़ताल से न केवल आम जनता परेशान होती है, बल्कि बैंकों के कारोबार और खुद कर्मचारियों के हितों को भी नुकसान पहुंचता है.5 दिन की बैंकिंग की मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि बाकी शनिवार (दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर) आम नागरिकों के लिए बैंक शाखाओं तक पहुंचने का बेहद अहम जरिया हैं. देश का हर वर्ग अपनी रोजाना की जरूरतों के लिए बैंकिंग सेवाओं पर निर्भर रहता है. ऐसे में सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे आंदोलन का रास्ता छोड़कर सकारात्मक बातचीत करें, ताकि देश की बैंकिंग व्यवस्था बिना किसी रुकावट के चलती रहे.

Written By
Aagaaz Express

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