दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा है खतरा,सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के सामने इस्तीफा देंगे सम्राट के मंत्री
बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है. सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर बिना विधायक या विधान पार्षद रहते हुए कैसे कोई मंत्री पद पर रह सकता है? याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए संविधान में छह महीने की छूट दी गई है लेकिन ये छूट केवल एक बार के लिए होती है. दीपक प्रकाश इस समयसीमा को पार कर चुके हैं.सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करेगी. वहीं, बिहार सरकार ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करेंगे. इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ये पूरी तरह कानून का सवाल है. राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधायक/विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से ज्यादा वक्त तक मंत्री कैसे बना रह सकता है. हम उनसे जवाब मांगेंगे.

दरअसल, दीपक प्रकाश जब पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे, तब वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. 6 महीने के अंदर विधायक या विधान पार्षद बनना अनिवार्य था लेकिन उसी बीच 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जिस वजह से कैबिनेट स्वत: ही भंग हो गई.वहीं, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद 7 मई 2026 को जब मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री बनाया गया लेकिन इस बार भी वह किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. उनकी तरफ से ये तर्क दिया जाता है कि 6 महीने की समय सीमा 7 मई 2026 से शुरू होगी लेकिन जानकार मानते हैं कि 20 नवंबर 2025 के आधार पर उनकी 6 महीने की समय सीमा तय माना जाएगी. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है.