JPSC को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ले सकती है बड़ी निर्णय,चयनित अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत?
झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों को निरस्त करने वाले राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. इन मामलों में डिप्टी कलेक्टर, फूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं. यह फैसला उनके लिए राहत भरा माना जा रहा है. वहीं CDPO पद पर चयनित अभ्यर्थियों से जुड़ी याचिका पर आज यानी 21 अगस्त को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई होनी है. ऐसे में आज की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं कि कोर्ट सरकार के CDPO नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर क्या रुख अपनाता है.दरअसल, सरकार ने कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच के आधार पर कई भर्ती परीक्षाओं और उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था. इसके बाद चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अब इन याचिकाओं पर कोर्ट की सुनवाई से सरकार के फैसले और हजारों चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है. हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट का आदेश JSSC-CGL समेत सरकार के पूरे फैसले पर लागू नहीं है.

20 अगस्त का हाईकोर्ट का आदेश मुख्य रूप से 11वीं-13वीं JPSC और Food Safety Officer से जुड़े याचिकाकर्ताओं के मामले तक सीमित है. इसके पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई थी. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना किसी ठोस व्यक्तिगत जांच के और बिना अभ्यर्थियों का पक्ष सुने पूरी की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को सीधे रद्द कर देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सरासर उल्लंघन है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि परीक्षा या चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत थी तो सरकार को व्यक्तिगत स्तर पर जांच करनी चाहिए थी. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी तरीके से हुआ है, उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा में वापस लिया जाए या उनकी जॉइनिंग प्रक्रिया को पूरा कराया जाए. वहीं हाईकोर्ट के फैसले से नाराज आंदोलनकारी छात्र शुक्रवार को 24 जिलों में सीएम हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने की तैयारी में हैं. आंदोलन स्थगित किए जाने के बावजूद छात्रों का कहना है कि सरकार ने कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा और उन्हें गुमराह करने का काम किया है. छात्रों ने सरकार को दो महीने का समय दिया है. उनकी मांग है कि इस दौरान भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच CBI को सौंप दी जाए.छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दो महीने के भीतर CBI जांच शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को फिर से बड़े स्तर पर शुरू किया जाएगा. यानी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन फिलहाल स्थगित जरूर हुआ है, लेकिन छात्रों का आक्रोश पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.