फिर से शुरू होने जा रही है सरकारी लॉटरी,एजेंसी के लिए नियम और वित्तीय शर्तें रहेंगी लागू
राज्य के प्रतिकूल वित्तीय हालात से निपटने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार करीब 25 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सरकारी लॉटरी की बिक्री शुरू करने जा रही है. इसके लिए राज्य के वित्त विभाग (निदेशालय कोषागार, लेखा व लॉटरीज) ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए ‘सोल एंड सेलिंग एजेंट’ नियुक्त करने हेतु टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी है.टेंडर की शर्तों के अनुसार इच्छुक कंपनियां 14 सितंबर 2026 की शाम 4:00 बजे तक अपनी ऑनलाइन बोली जमा कर सकती हैं. लॉटरी योजना के तहत एक दिन में अधिकतम 12 ड्रा किए जा सकेंगे. इसके अलावा साल में तीन विशेष बंपर ड्रा आयोजित किए जाएंगे. राष्ट्रीय अवकाश के दिन कोई भी लॉटरी ड्रा आयोजित नहीं किया जाएगा. लॉटरी की बिक्री ‘हिमाचल प्रदेश लॉटरी नियम-2026’ के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू नियमों के तहत ही संचालित होगी.लॉटरी की बिक्री का ठेका हासिल करने वाली एजेंसी को कड़े वित्तीय नियमों का पालन करना होगा. एजेंसी को सरकार को हर साल कम से कम 10 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस देनी होगी, जिसमें प्रतिवर्ष 5% की बढ़ोतरी की जाएगी. इसके अतिरिक्त, एजेंसी को प्रतिवर्ष कम से कम 6 करोड़ रुपये की गारंटेड न्यूनतम राशि भी जमा करनी होगी. यदि तय राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर सरकार का हिस्सा इससे अधिक बनता है, तो अतिरिक्त राशि का भुगतान भी एजेंसी को करना होगा. सुरक्षा के तौर पर सरकार ने बोलीदाता एजेंसी से 30 करोड़ रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगा है.

उल्लेखनीय है कि राज्य में वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सरकारी लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. उस समय लॉटरी को बंद करने का मुख्य कारण रातों-रात लखपति बनने के चक्कर में आम और गरीब परिवारों का बर्बाद होना था. साथ ही, युवा वर्ग और महिलाएं भी लॉटरी के इस भ्रमजाल में फंसकर आर्थिक नुकसान झेल रही थीं. हालांकि, वर्तमान में राज्य के समक्ष पैदा हुए प्रतिकूल वित्तीय हालात और बढ़ते वित्तीय घाटे को देखते हुए राज्य सरकार को एक बार फिर इस विकल्प को अपनाने का फैसला लेना पड़ा है.