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बिहार में बंद पड़े 9 चीनी मिलों को सम्राट करने जा रही है शुरू,चीनी उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार

बिहार में बंद पड़े 9 चीनी मिलों को सम्राट करने जा रही है शुरू,चीनी उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार
  • PublishedJune 23, 2026

बिहार में गन्ना किसानों, युवाओं और उद्योग जगत के लिए बड़ी उम्मीद की खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने गन्ना आधारित उद्योगों को दोबारा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में बंद पड़ी 9 चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही गन्ना किसानों को राहत देते हुए पांच एकड़ तक खेती करने वाले किसानों को गन्ना बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान देने की घोषणा की गई है.लोक सेवक आवास में सोमवार को हुई गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ राज्य में चीनी उद्योग की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि बिहार में गन्ना आधारित उद्योगों के विकास की काफी संभावनाएं हैं. इसे रोजगार सृजन, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है.मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उन इलाकों में औद्योगिक गतिविधियों को दोबारा बढ़ाने पर जोर दिया, जहां वर्षों से चीनी मिलें बंद पड़ी हैं. इनमें रैयाम, सकरी, सासामुसा, मधौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी की चीनी मिलें शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इन मिलों के पुनर्जीवित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा.चंपारण क्षेत्र को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन केंद्रों में शामिल करने के लिए भी विशेष योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रही है.गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने बताया कि किसानों की लागत कम करने के लिए सरकार पांच एकड़ तक गन्ना खेती करने वाले किसानों को बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान देगी. इससे छोटे और मध्यम किसानों को सीधा लाभ मिलेगा.

सरकार को उम्मीद है कि जो किसान किसी कारण से गन्ने की खेती से दूर हो गए थे, वे दोबारा इस फसल की ओर लौटेंगे.राज्य सरकार का फोकस केवल पुरानी मिलों को चालू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नए निवेश को आकर्षित करने और चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण पर भी है. एथेनॉल उत्पादन, बायो-सीएनजी, को-जनरेशन और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है.इसी दिशा में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार (संजय पासवान) का पुणे दौरा भी महत्वपूर्ण रहा. दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों और निवेश की संभावनाओं का अध्ययन किया. मंत्री ने वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट का दौरा कर गन्ने की बेहतर प्रजातियों, आधुनिक खेती तकनीक और टिश्यू कल्चर आधारित पौध उत्पादन प्रणाली की जानकारी ली.इसके अलावा पुणे में निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ बैठक कर बिहार में नई चीनी मिलों की स्थापना, बंद मिलों के पुनर्जीवन, एथेनॉल उत्पादन और जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई.मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार बिहार को गन्ना उत्पादन, जैव ऊर्जा और कृषि आधारित उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की तैयारी है. सरकार निवेशकों को बेहतर माहौल और जरूरी सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है.अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश आने की उम्मीद है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा और लाखों गन्ना किसानों की आय में सुधार हो सकता है.

Written By
Aagaaz Express

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