पावन महीना सावन में इस दिन लगेगा सूर्य और चंद्र ग्रहण,एक ही महीने में दो ग्रहण का होना अशुभ संकेत है?
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है. जब भी आकाश मंडल में कोई बड़ी खगोलीय घटना होती है, तो उसका असर न केवल आम आदमी पर, बल्कि देश और दुनिया की राजनीति और पर भी देखने को मिलता है. साल 2026 का सावन का महीना कुछ ऐसे ही बड़े और संवेदनशील बदलावों का गवाह बनने जा रहा है. इस बार भगवान शिव के प्रिय महीने सावन में केवल 16 दिनों के भीतर दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं.सावन अमावस्या पर जहां साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण लगेगा, वहीं सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर चंद्र ग्रहण का साया रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी 15 या 16 दिनों के छोटे अंतराल में दो या दो से अधिक ग्रहण लगते हैं, तो उसे प्राकृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और बड़े बदलावों का संकेत माना जाता है. आइए जानते हैं इन दोनों ग्रहणों की तारीख और इनका देश-दुनिया पर क्या असर होने जा रहा है.ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. यह मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में दिखाई देगा. अमावस्या तिथि खुद ही आध्यात्मिक साधना और पितरों के स्मरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में इस दिन सूर्य ग्रहण का योग बनने से इसकी धार्मिक और ज्योतिषीय महत्ता और बढ़ जाती है. मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में थोड़े से परिवर्तन होते हैं, इसलिए इस समय पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करना शुभ माना जाता है. हालांकि ग्रहण काल में भोजन करने और शुभ कामों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है.सूर्य ग्रहण के करीब 16 दिन बाद 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा. जो कि भारत में दिखाई नहीं देगा. पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से माना जाता है और चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है, ऐसे में इस दिन ग्रहण लगने की खबर ने लोगों को चिंता बढ़ा दी है.ज्योतिषियों के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव व्यक्ति की भावनाओं, मानसिक स्थिति और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है.

हालांकि इसका असर हरव्यक्ति पर समान नहीं होता, बल्कि उसकी जन्म कुंडली और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.ज्योतिष शास्त्र में जब 15 दिनों के भीतर दो ग्रहण लगते हैं, तो उसे सामान्य घटना नहीं माना जाता. कई विद्वान इसे बड़े परिवर्तन, मौसम में बदलाव, प्राकृतिक गतिविधियों और देश-दुनिया के स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के संकेत के रूप में देखते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यह पूरी तरह अशुभ ही होगा. ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण परिवर्तन का प्रतीक है. इसलिए इसे केवल डर या नकारात्मकता से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में भगवान शिव के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि ग्रहण के समय ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है. कई श्रद्धालु ग्रहण के पूरा होने के बाद स्नान और दान-पुण्य भी करते हैं.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में पूजा, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है. वहीं ग्रहण के दौरान भोजन करने, नई वस्तु खरीदने या किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है. ग्रहण पूरा होने के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है.