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सेंसेक्स-निफ्टी हुआ धड़ाम,अमेरिका-ईरान युद्ध के वजह से गिरा भारतीय शेयर बाजार

सेंसेक्स-निफ्टी हुआ धड़ाम,अमेरिका-ईरान युद्ध के वजह से गिरा भारतीय शेयर बाजार
  • PublishedSeptember 2, 2026

बुधवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद बुरी खबर लेकर आई. ट्रेडिंग का पहला मिनट ही निवेशकों के लिए भारी नुकसान का सबब बन गया. सेंसेक्स में लगभग 700 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 200 अंक से ज्यादा टूट गया. इस बड़े भूचाल के पीछे कोई घरेलू कारण नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच अचानक बढ़ा तनाव है. रातों-रात दोनों देशों के बीच हुए हमलों ने पूरी दुनिया के आर्थिक बाजार को हिलाकर रख दिया है.डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने रात के समय ईरान में सैन्य ठिकानों पर कई हवाई हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया. इन हमलों का असर पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों पर पड़ा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने इस खौफ के माहौल ने निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया. इसी वजह से एशियाई बाजारों में भी गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया.बाजार खुलने से पहले ही इस बड़ी गिरावट का अंदेशा हो चुका था. प्री-ओपनिंग सेशन में ही सेंसेक्स 540 अंक गिरकर 76,397.24 के स्तर पर आ गया था. निफ्टी का हाल भी कुछ ऐसा ही था, जो 203 अंक फिसलकर 23,852.05 पर ट्रेड कर रहा था. सुबह 7:38 बजे गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स भी 24,033.5 अंक पर था, जिसने बाजार की नेगेटिव शुरुआत पर मुहर लगा दी थी. मंगलवार को निफ्टी 24,055.8 पर बंद हुआ था.

इस भारी बिकवाली में सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये रही कि सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से सिर्फ सनफार्मा का शेयर ही मुनाफे में नजर आया. बाकी सभी दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में गोते लगाते दिखे.इस युद्ध जैसे हालात का सबसे बड़ा नुकसान ऊर्जा बाजार को हुआ है. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में रातों-रात 2 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया. इसकी कीमत बढ़कर 96.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. ये पिछले छह हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर ये विवाद लंबा खिंचता है, तो तेल की कीमतें लंबे समय तक आसमान पर बनी रह सकती हैं.कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को फिर से जिंदा कर दिया है. ग्लोबल बांड यील्ड में तेजी देखी जा रही है. निवेशकों को डर है कि अमेरिका में निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं. अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो विदेशी निवेशक उभरते हुए बाजारों (जैसे भारत) से अपना पैसा निकाल सकते हैं. कड़े वैश्विक मौद्रिक हालात जोखिम वाली संपत्तियों पर भारी दबाव डाल रहे हैं. मिडिल ईस्ट दुनिया भर में ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र है, ऐसे में वहां होने वाली कोई भी हलचल सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को प्रभावित करती है.

Written By
Aagaaz Express

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